May 26, 2024

सिंडिकेट बैंक में करोड़ों के घोटाले के आरोपी ने अपनी 200 करोड़ की संपत्ति बचाने के लिए ऐसा कारनामा किया कि एक बार तो ईडी के अधिकारी भी नहीं भाप सके। सिंडिकेट बैंक घोटाले में आरोपी ने कुर्की के दायरे में आई 200 करोड़ रुपए संपत्तियों को बचाने के लिए एक सामान्य आदमी के नाम शेयर ट्रांसफर कर दिए। ईडी की पूछताछ में उस व्यक्ति ने स्वीकार किया कि उसे इन शेयरों के बारे में जानकारी नहीं। उसने तो केवल कुछ दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। वह तो एक निजी कंपनी में छोटी-सी तनख्वाह पर नौकरी करता है। अब ईडी ने गड़बड़ी में लिप्त लोगों पर पीएमएलए के तहत कार्यवाही की तैयारी शुरू कर दी है।
1250 करोड़ रु. के घोटाले में आरोपी गुमान ग्रुप के शंकर खंडेलवाल के नाम जयपुर लैंड मार्क और जयपुर बिल्ड फर्म नाम से दो कंपनियांे के शेयर थे। इनमें से एक में 100 और दूसरी में 48 प्रतिशत शेयर उनके नाम थे। दोनों कंपनियों के 2 प्रोजेक्ट कालवाड़ रोड पर चल रहे हैं।
इनमें घोटाले से मिली रकम का मोटा हिस्सा खपाया गया था। दोनों की कुल कीमत 200 करोड़ है। घोटाले का खुलासा होते ही ईडी भी सक्रिय हो गई। ऐसे में इन संपत्तियों पर कुर्की की तलवार लटक गई। खंडेलवाल की गिरफ्तारी के बाद अचानक ये शेयर एक सामान्य आदमी के नाम हो गए। जिस वक्त यह काम किया गया उस समय खंडेलवाल जेल में थे। ईडी की जांच में सामने आया कि बाद में इनमें से अधिकतर शेयर अन्य बिल्डर के नाम हस्तांतरित हो गए। उस व्यक्ति के नाम पर नाममात्र के शेयर रह गए। ईडी की पूछताछ में मध्यस्थ बनाए गए उस व्यक्ति ने स्वीकारा एक निजी कंपनी में छोटी-सी तनख्वाह पर नौकरी करता है। उसे इन कंपनियों की संपत्तियों, लेनदारियों, देनदारियों के बारे में कुछ नहीं पता था। ही वह इनकी एजीएम या विशेष मीटिंगों में कभी शामिल हुआ था।
अपराधसे मिली रकम से ली गई संपत्तियों की कुर्की होती है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लाउंड्रिंग एक्ट के तहत इन पर ईडी का कब्जा हो जाता है। चाहे कार्रवाई के समय वह किसी के भी नाम हों। ऐसे में इन बिल्डिंगों में कोई सामान्य आदमी भी प्रॉपर्टी खरीदता है तो भी वह कुर्क की जा सकती हैं।