May 21, 2024

– 2जी पर फैसले को कांग्रेस सम्मान के तमगे और सर्टिफिकेट की तरह ले रही है: जेटली

– मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार साबित हुए: मनमोहन

– साबित हो गया कि विपक्ष के झूठ का घोटाला हुआ है: कपिल सिब्बल

– विशेष अदालत के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देगी सीबीआई

देश के सबसे बड़े घोटाले 2जी स्पेक्ट्रम स्कैम में सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला आ गया है। कोर्ट ने ए राजा और कनिमोझी समेत सभी 25 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा है कि सभी 25 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी किया गया है। आपको बता दें कि इस 2जी घोटाले में 1.76 लाख करोड़ रुपए का घोटाले का आरोप लगा था और इसमें पूर्व टेलिकॉम मिनिस्टर ए राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी आरोपी थे। अदालत ने सभी को बरी कर दिया है। बताया जा रहा है कि कोर्ट में फैसले के बाद तालियां बजाई गईं। सरकारी वकील इस मामले में आरोप साबित करने में सफल नहीं हो पाए। आपको बता दें कि यूपीए सरकार में हुए अब तक के सबसे बड़े घोटालों में से एक 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर ये फैसला आया है। अदालत ने सभी 25 आरोपियं को बरी कर दिया है। 2जी घोटाले में सीबीआई ने सबसे पहली गिरफ्तारी साल 2011 में की थी। अदालत के फैसले के बाद सियासी मैदान से बयानबाजियों का दौर शुरू हो गया है। सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तंज कसते हुए कहा है कि 2जी पर फैसले को कांग्रेस सम्मान के तमगे और सर्टिफिकेट की तरह ले रही है, लेकिन उसकी शून्य राजस्व घाटे का सिद्धांत तभी गलत साबित हो गया था जब सुप्रीम कोर्ट ने स्पेक्ट्रम आवंटन रद्द कर दिया था।

जेटली ने कहा कि कांग्रेस के लोग ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे उन्हें ईमानदारी का सर्टिफिकेट मिल गया हो। 2जी आवंटन में अनियमितता हुई थी। नीलामी के जरिए लाइसेंस नहीं दिए गए थे। जेटली ने कहा कि मुझे यकीन है जांच एजेंसियां इस फैसले पर गौर करेगी और आगे के कदम पर फैसला करेगी।

उधर, जेटली की प्रतिक्रिया के फौरन बाद कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अरुण जेटली झूठों के सरदार हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘झूठ के काले बादल छंट गए। सीबीआई कोर्ट ने साबित किया कि सत्य की जीत हुई। मोदीजी, बीजेपी, विनोद राय ने साजिश रची जिसे बेनकाब कर दिया गया। क्या वे सभी देश से माफी मांगेंगे।’ उन्होंने कहा कि झूठ को सीढ़ी बनाकर बीजेपी सत्ता तक पहुंची।

गौरतलब है कि सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 2G घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और द्रमुक नेता कनीमोई समेत 19 आरोपियों को बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश ओ. पी. सैनी ने राजा और कनीमोई के अलावा शाहिद बलवा, विनोद गोयनका, आसिफ बलवा, राजीव अग्रवाल, करीम मोरानी, पी. अमीरथम और शरद कुमार को भी इस मामले में बरी कर दिया।

फैसला आने के बाद कांग्रेस ने पूर्व महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय से माफी की मांग करते हुए कहा है कि उन्हें सभी मौजूदा पदों से त्यागपत्र दे देना चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए संसद परिसर में कहा ‘कैग का आरोप अनुमानों पर आधारित था, और अनुमान न्यायिक प्रक्रिया में टिक नहीं सकते।’ उन्होंने कहा कि विनोद राय को देश से माफी मांगनी चाहिए। साथ ही मौजूदा सरकार ने जिन पदों पर उनकी नियुक्ति की है उन्हें सभी से इस्तीफा दे देना चाहिये।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील कपिल सिब्बल ने कहा है, ‘साबित हो गया कि विपक्ष के झूठ का घोटाला हुआ है। बिना किसी सबूत के यूपीए सरकार पर निराधार आरोप लगाए गए।’ सिब्बल ने कहा, ‘तत्कालीन कैग विनोद राय ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ साजिश की थी। इस फैसले ने साबित कर दिया है कि राय की निष्ठा किस ओर थी। जब मैंने जीरो लॉस की बात कही थी तो तत्कालीन विपक्ष और ऑनलाइन ट्रोलर्स ने मुझे निशाने पर लिया था। आज यूपीए सरकार की बात पर मुहर लगाई है।’

फैसले के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब यह साबित हो गया है कि उनके खिलाफ दुश्प्रचार किया गया था।

फैसले में कोर्ट ने क्या कहा?

2G स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामलों में पटियाला हाउस कोर्ट ने आज सभी तीन केसों में मुख्य आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और कनिमोझी समेत सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओपी सैनी की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सीबीआई ए राजा, कनिमोझी सहित सभी आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत उपलब्ध कराने में विफल रही। हालांकि अब सवाल ये उठता है कि क्या इस फैसले के मायने ये हैं कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं हुई?

अगर हम कोर्ट के फैसले पर गौर करें तो न्यायालय ने आरोपियों को बरी तो किया है लेकिन ये नहीं कहा है कि 2008 में यूपीए सरकार के दौरान हुए 2जी आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश के अनुसार इस केस में सीबीआई सबूतों के आधार पर ये साबित नहीं कर सकी कि सभी आरोपी घोटाले में शामिल थे और इसी कारण उन्हें बरी किया गया है।

दरअसल कोर्ट इस मामले में तीन केस पर सुनवाई कर रही थी। पहला – क्या ए राजा और अन्य आरोपी 2जी घोटाले की आपराधिक साजिश में शामिल थे, दूसरा केस था Essar कंपनी और उसके प्रमोटर्स के खिलाफ और तीसरा केस था ए राजा सहित अन्य व्यक्तियों और कंपनियों के खिलाफ 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग का।

पहले दो मामले सीबीआई ने दर्ज किए थे, जबकि तीसरा केस प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दर्ज किया था। गुरुवार को पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा कि इन तीनों मामलों को अभियोजन पक्ष कोर्ट में सबूतों के आधार पर साबित नहीं कर सका इसलिए आरोपियों को दोषमुक्त किया गया। इसका मतलब ये नहीं है कि कोर्ट ने ये कहा है कि 2जी घोटाला हुआ ही नहीं था। कोर्ट इन सभी मामलों में इसी बिनाह पर कार्यवाही की है कि 2जी आवंटन में किन जगहों पर क्या गड़बड़ियां हुई हैं।

क्या है 2जी घोटाला?

2 जी घोटाला साल 2010 में प्रकाश में आया जब भारत के महालेखाकार और नियंत्रक ने अपनी एक रिपोर्ट में साल 2008 में किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन पर सवाल खड़े किए. 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कंपनियों को नीलामी की बजाए पहले आओ और पहले पाओ की नीति पर लाइसेंस दिए गए थे, जिसमें भारत के महालेखाकार और नियंत्रक के अनुसार सरकारी खजाने को एक लाख 76 हजार करोड़ रूपयों का नुकसान हुआ था. आरोप था कि अगर लाइसेंस नीलामी के आधार पर होते तो खजाने को कम से कम एक लाख 76 हजार करोड़ रूपयों और प्राप्त हो सकते थे.

केस के आरोपी

ए राजा, पूर्व दूरसंचार मंत्री; सिद्धार्थ बेहुरा, पूर्व दूरसंचार सचिव; आरके चंदोलिया, आईईएस आॅफिसर और तत्कालीन दूरसंचार मंची ए राजा के पर्सनल सेक्रेटरी; शाहिद उस्मान बलवा, स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डाइरेक्टर; विनोद गोयनका, स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड के डाइरेक्टर और डीबी रियल्टी के मैनेजिंग डाइरेक्टर; स्वान टेलीकॉम प्रा. लि.; संजय चंद्र, मैनेजिंग डाइरेक्टर, यूनिटेक लिमिटेड; यूनिटेक वायरलेस लिमिटेड (तमिलनाडु); गौतम दोशी, ग्रुप मैनेजिंग डाइरेक्टर, रिलायंस एडीए ग्रुप; सुरेंद्र पीपारा, ग्रुप प्रेसिडेंट, रिलायंस एडीए ग्रुप; हरि नायर, वाइस प्रेसिडेंड, रिलायंस एडीए ग्रुप; रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड; कनिमोझी करुनानिधि, इाइरेक्टर/प्रमोटर, कलाइग्नर टीवी प्राइवेट लिमिटेड; रविकांत रुइया, वाइस चेयरमैन, एस्सार ग्रुप; अंशुमान रुइया, प्रमोटर, एस्सार ग्रुप; आईपी खेतान, प्रमोटर, खेतान ग्रुप; किरण खेतान, पूर्व डाइरेक्टर, सांता ट्रेडिंग प्रा. लि.; लूप टेलीकॉम लिमिटेड; लूप मोबाइल लिमिटेड; एस्सार टेलीहोल्डिंग लिमिटेड

विशेष अदालत के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देगी सीबीआई

सीबीआई 2जी मामले में विशेष अदालत के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती देगी। एजेंसी के प्रवक्ता के अभिषेक दयाल ने यह जानकारी दी है। सीबीआई ने कहा है कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले में साक्ष्यों को उचित परिप्रेक्ष्य में नहीं लिया गया।

प्रवर्तन निदेशालय 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन धनशोधन मामले में 19 लोगों को बरी किए जाने के विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करेगा। एजेंसी सूत्रों ने बताया कि एजेंसी आदेश का अध्ययन करेगी और अपने सबूत तथा जांच के साथ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।

सूत्रों ने कहा कि यह देखना होगा कि प्रवर्तन निदेशालय के मामले को अदालत द्वारा क्या केवल इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि सीबीआई की जांच को खारिज दिया गया है या ऐसा करने के अन्य कारण हैं।

न्यायाधीश ओ पी सैनी की एक विशेष अदालत ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और द्रमुक नेता कनीमोई सहित 19 आरोपियों को 2जी घोटाला मामले से संबंधित प्रवर्तन निदेशालय के धनशोधन मामले से बरी कर दिया है।

विशेष न्यायाधीश ने राजा और कनीमोई के अलावा शाहिद बलवा, विनोद गोयनका, आसिफ बलवा, राजीव अग्रवाल, करीम मोरानी, पी अमिरतम और शरद कुमार को भी मामले के सिलसिले में बरी कर दिया।

प्रवर्तन निदेशालय ने आरोपपत्र में द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि की पत्नी दयालू अम्मा को भी मामले में आरोपी बनाया था जिसमें उसने आरोप लगाया था कि स्वान टेलीकॉम (प्राइवेट) लिमिटेड :एसटीपीएल: प्रमोटर्स द्वारा 200 करोड़ रुपये का भुगतान द्रमुक संचालित कलैंगर टीवी को किया गया था।

2जी केस में अदालत के फैसले पर मोदी सरकार की तरफ से पहली प्रतिक्रिया आई है। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा है की सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रक्रिया को गलत माना था और बिना नीलामी के जरिए लाइसेंस दिए गए थे। जेटली ने कहा है कि 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में गड़बड़ी हुई थी। अरूण जेटली ने कहा कि इस केस में अदालत के फैसले को सर्टिफिकेट न समझा जाए।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि इस घोटाले को लेकर यूपीए सरकार के खिलाफ प्रौपेगेंडा फैलाया गया था। मनमोहन सिंह ने कहा है कि इस केस में सभी आरोप खराब नीयत से लगाए गए थे। ये फैसला सब अपने आप में सब कुछ कहता है।

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी अदालत के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ये हमारी जीत है। अदालत ने भी मान लिया है कि सभी आरोप निराधार थे।

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि आज स्पष्ट रूप से अदालत ने पाया है कि कैसे निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा था। जस्टिस ने काम किया है क्योंकि यह हमारे देश में काम करने वाला है।

अदालत के फैसले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि आज मेरी बात सिद्ध हो गई है कि कोई करप्शन नहीं, कोई लॉस नहीं, अगर स्कैम है तो झूठ का स्कैम है। इस फैसले के आने के बाद प्रधानमंत्री और पूर्व CAG चीफ विनोद राय को माफी मांगनी चाहिए।

सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के बाद राज्यसभा और लोकसभा में ये मुद्दा तुरंत उठ गया है और कांग्रेस ने हंगामा शुरू कर दिया। राज्यसभा में गुलाम नबी आजाद ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस घोटाले की वजह से सरकार गई थी वो हुआ ही नहीं और आज ये साबित भी हो गया है।

देश के सबसे बड़े घोटाले का घटनाक्रम

यूपीए सरकार के समय हुए देश के सबसे बड़े घोटाले 1.76 लाख करोड़ के 2जी घोटाले के आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। दिल्ली की स्पेशल सीबीआई कोर्ट 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा , द्रमुक सांसद कनिमोझी और कई अन्य को सबूतों के अभाव में बरी करने का फैसला सुनाया।

1.76 लाख करोड़ के इस घोटाले में कब-कब क्या हुआ

मई 2007: एंडिमुथु राजा यानि ए राजा केंद्रीय दूरसंचार मंत्री बने।

अगस्त 2007: दूरसंचार विभाग ने 2जी स्पेक्ट्रम का लाइसेंस जारी करना शुरु किया।

2 नवंबर, 2007: यूपीए सरकार के वक्त के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस के आवंटन में पारदर्शिता बरतने और फीस की समीक्षा को लेकर ए राजा को चिट्ठी लिखी थी। इसके जवाब में राजा ने भी पीएम को चिट्ठी लिखकर कहा कि मेरी कई सिफारिशों को खारिज कर दिया गया।

22 नवंबर, 2007: वित्त मंत्रालय ने दूरसंचार मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखी, इसमें 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस के आवंटन के लिए अपनाई जा रहे तरीकों पर चिंता जताई।

10 जनवरी, 2008: दूरसंचार मंत्रालय ने लाइसेंस देने के लिए पहले आओ-पहले पाओ की नीति अपनाई। इसके लिए कट ऑफ की तारीख बढ़ाकर 28 सितंबर कर दिया गया।

4 मई, 2009: टेलीकॉम वॉचडॉग एनजीओ ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) में 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस के आवंटन धांधली की शिकायत की।

21 अक्टूबर, 2009: सीबीआई ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा मामला दर्ज किया।

मई 2010: एनजीओ ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल)’ ने स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितताओं की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय की याचिका दायर की।

8 अक्टूबर, 2010: सर्वोच्च न्यायालय ने कथित घोटाले पर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पर सरकार का जवाब मांगा।

10 नवंबर, 2010: कैग ने सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान बताया।

14 नवंबर, 2010: ए राजा ने संचार मंत्री के पद से इस्तीफा दिया।

8 दिसंबर 2010: सर्वोच्च न्यायालय ने 2 जी घोटाले की जांच के लिए एक विशेष अदालत की स्थापना का आदेश दिया।

2 फरवरी, 2011: राजा गिरफ्तार।

2 अप्रैल, 2011: सीबीआई ने मामले में आरोपपत्र दाखिल किया।

29 अप्रैल, 2011: सीबीआई ने मामले में पूरक आरोपपत्र दायर किया।

15 सितंबर, 2011: भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने पी.चिदंबरम को सह-अभियुक्त बनाने के लिए सीबीआई की विशेष अदालत में याचिका दाखिल की।

22 अक्टूबर 2011: विशेष सीबीआई अदालत ने राजा सहित 17 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए।

22 अक्टूबर 2011: न्यायालय ने राजा और अन्य के खिलाफ आरोप तय किए।

11 नवंबर, 2011: मामले में मुकदमा शुरू हुआ।

23 नवंबर, 2011: सर्वोच्च न्यायालय ने पांच कॉपोर्रेट प्रमुखों को जमानत दी।

12 दिसंबर 2011: सीबीआई ने तीन आरोप पत्र दाखिल किए। इनमें एस्सार के प्रमोटर अंशुमन रुइया, रवि रुइया, एस्सार ग्रुप के रणनीतिक और नियोजन निदेशक विकास श्राफ, लूप टेलीकॉम प्रमोटर किरण खेतान और उनके पति आईपी खेतान, लूप टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड, लूप मोबाइल इंडिया लिमिटेड और एस्सार टेली होल्डिंग शामिल है।

2 फरवरी, 2012: सर्वोच्च न्यायालय ने 2008 में जारी 122 लाइसेंसों को रद्द करने का आदेश दिया, कंपनियों को ऑपरेशन बंद करने के लिए चार महीने का समय दिया गया।

4 फरवरी, 2012: अदालत ने गृह मंत्री पी चिदंबरम को आरोपी बनाने के लिए स्वामी की याचिका को खारिज कर दिया।

28 नवंबर, 2011: डीएमके के सांसद कनिमोझी को जमानत मिल गई।

15 मई 2012: राजा को मिली जमानत ।

25 मई 2012: अदालत ने एस्सार और लूप के प्रमोटरों के खिलाफ आरोप तय किए और जमानत दे दी।

25 अप्रैल, 2014: ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने राजा, कनिमोझी और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दायर किए।

31 अक्टूबर 2014: राजा, कनिमोझी और अन्य लोगों के खिलाफ धन शोधन के आरोप लगाए गए।

17 नवंबर 2014: धन शोधन मामले में मुकदमा शुरू हो गया।

5 दिसंबर, 2017: न्यायालय ने मामले में फैसला सुनाने के लिए 21 दिसंबर का दिन निर्धारित किया।

21 दिसंबर: राजा और कनिमोझी सहित सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया।