April 14, 2024

बीकानेर। संवेदनशील और पारदर्शी सरकार देने की बात कहने वाली राज्य सरकार के दावे अब खोखले साबित हो रहे है। ऐसा लगता है कि सरकार नाम की कोई चीज ही नहीं है। इस सरकार में जब चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त निदेशक प्रशासन एव ंपदेन सयुंक्त शासन सचिव बी के अग्रवाल के आदेशों को भी नहीं माना जा रहा है तो आमजन की अव्यवस्थाओं के खिलाफ की गई शिकायतो के क्या हॉल होगे। ये आरोप पीबीएम हेल्प कमेटी की ओर से आनंद निकेतन में आयोजित पत्रकार वार्ता में अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह राजपुरोहित ने लगाये। उन्होने कहा कि अतिरिक्त निदेशक ने 13 अक्टुबर को जिला कलक्टर बीकानेर को एक पत्र लिखकर पीबीएम अस्पताल में इलाज के नाम पर हर माह हो रहे करोड़ो रूपये के घोटाले की जांच आरएएस अधिकारी के अध्यक्षता में एक जांच कमेटी के जरिये करवाने की बात कही। किन्तु पचास दिनों से भी अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अब तक इस प्रकरण में जिला कलकटर की ओर से न तो कोई जांच कमेटी का गठन किया गया है और न ही इस प्रकार की कोई कमेटी गठित की गई है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि जिला प्रशासन पीबीएम में हुए घोटालों में लिप्त दोषियों को बचाने में लगे है। राजपुरोहित ने बताया कि कमेटी पिछले सात माह से पीबीएम में व्याप्त अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठा रही है। लेकिन पीबीएम प्रशासन व मेडिकल कॉलेज प्राचार्य धन बल के आधार पर कमेटी के सदस्यों व उन पर झूठे मुकद्दमें दर्ज करवा कर आवाज को दबाना चाहते है। किन्तु वे पीछे हटने वालों में से नहीं है। जब तक पीबीएम में सुधार नहीं हो जाता तथा दोषियों पर कार्यवाही नहीं हो जाती। उनका आन्दोलन जारी रहेगा। अब कमेटी आरपार की लड़ाई लड़ते हुए सोमवार को जिला कलक्टर को अंतिम स्मरण पत्र देगी और 15 दिनों में दोषियों पर कार्यवाही की मांग करेगी। अगर उसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होती तो वे अपनी कमेटी सदस्यों के साथ 18 दिसम्बर से सरदार मेडिकल कॉलेज के सामने आमरण अनशन पर बैठेंगेे। राजपुरोहित ने बताया कि पीबीएम व मेडिकल कॉलेज प्रशासन में लगाई गई सूचना के अधिकार की जानकारी भी अधूरी दी गई है। प्रेस वार्ता में अंकुर शुक्ला,हनुमान शर्मा,बजरंग दैया,मुमताज शेख,एस एस शर्मा,सुरेन्द्र जोशी,हरजीत सिंह,सुभाष विश्नोई,श्याम सुंदर व अनिल मिढ्ढा शामिल थे।
बाहर हो रही जांचों भी उठाया सवाल
राजपुरोहित ने बताया कि न तो पीबीएम प्रशासन और न ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन संभागीय आयुक्त द्वारा की गई जांच के बाद आई रिपोर्ट में दोषी लोगों पर कार्यवाही करने में रूचि दिखा रहे है। उन्होंने कहा कि आज भी अनेक चिकित्सक कमीशन के चक्कर में महत्वपूर्ण और मंहगी जांचे निजी लैबों से ही करवा रहे है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की ओर से हार्ट,न्यूरों,कैंसर जैसे गंभीर रोगों की जांचे अस्पताल में फ्री होने के बाद भी बाहर की लैबों से करवाई जा रही है। जिसके प्रमाण अनेक बार मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को सौंपे जा चुके है। उसके बाद भी न तो उन चिकित्सकों पर न ही ऐसे नर्सिग स्टॉफ पर कोई ठोस कार्यवाही हुई है। इतना ही नहीं पीबीएम में सुरक्षा,सफाई,नि:शुल्क दवा पर्याप्त नहीं मिलना,जांचों की रिपोर्ट देरी से देना जैसी शिकायतों का निस्तारण भी नहीं हो रहा है।
अब पीबीएम में प्रवेश पर पाबंदी
राजपुरोहित ने कहा कि मेडिकल कॉलेज प्राचार्य और पीबीएम प्रशासन ने अपने कारनामों को छुपाने के लिये पुलिस का सहारा लिया है और उनके पीबीएम प्रवेश की स्थिति में पुलिस को बुलाकर उन्हें गिरफ्तार करवाने में लगी है। जबकि संविधान में कही भी ऐसा नहीं लिखा है कि पुलिस व प्रशासन किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करें। सुरेन्द्र ने अपनी जान का खतरा बताते हुए गृहमंत्री से सुरक्षा की गुहार लगाई है।
स्थाई लोक अदालत के निर्णय की पालना नहीं
कमेटी के अंकुर शुक्ला ने कहा कि पीबीएम प्रशासन द्वारा न्यायालय के निण्रय को भी दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने स्थाई लोक अदालत के उस निर्णय की जानकारी देते हुए बताया जिसमें ट्रोमा सेन्टर में सिर में चोट लगे गंभीर हालात में पहुंचने वाले रोगियों की सिटी स्केन सेन्टर परिसर में ही करने के आदेश दिये थे। शुक्ला ने बताया कि 23.12.2016 को लोक अदालत ने निर्णय सुनाते हुए गंभीर स्थिति में आने वाले मरीजों की सिटी स्केन ट्रोमा सेन्टर परिसर में ही नि:श़ुल्क करवाने को कहा था। लेकिन आज दिनांक तक ट्रोमा सेन्टर में सिटी स्केन मशीन नहीं लगाई गई। जिसके चलते पीबीएम मे लगी महाराजा सिटी स्केन मशीन पर मजबूरन मरीजों को ठगी का शिकार होना पड़ता है। शुक्ला ने बताया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से स्थाई लोक अदालत के निर्णय की अवमानना के विरूद्व वे कोर्ट ऑफ कन्टेमंट लगायेंगे।