February 22, 2024

जोधपुर। किसानों की हालत इसबार और भी ज्यादा खराब हो गई है। प्रदेश में खरीफ की प्रमुख फसल बाजरे की बुवाई क्षेत्रफल बढऩे के बावजूद इस बार पैदावार में गिरावट हुई है। आधा दर्जन अन्य फसलों में भी गत वर्ष के मुकाबले उपज घटी है। जबकि चावल की खेती में बम्पर पैदावार हुई है। इसके अलावा मक्का और ज्वार के उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है। राजस्व मण्डल की सांख्यिकी विंग ने प्रदेशभर के जिलों से प्राप्त गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर खरीफ 2017-18 का बुवाई क्षेत्रफल और उपज के आंकड़े तैयार कर लिए हैं। प्रदेश में खरीफ की फसल में इस बार कम बारिश होना मुख्य कारण रहा है। अधिकांश जिलों और उपखण्ड क्षेत्रों में इस बार औसत से भी कम वर्षा के कारण ही सर्दी का पसंदीदा मुख्य अनाज बाजरे की फसल उत्पादन में सौ किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की कमी हुई है। जबकि इस बार किसानों ने बुवाई का रकबा बढ़ाकर 8 हजार 113 हैक्टेयर क्षेत्रफल में अधिक बुवाई की थी। गत वर्ष 41 लाख 50 हजार 312 हैक्टेयर क्षेत्रफल में बुवाई कर 41 लाख 54 हजार 965 टन यानी एक हजार एक किग्रा. प्रति हैक्टेयर का उत्पादन किया। लेकिन इस बार बुवाई तो बढ़कर 41 लाख 58 हजार 425 हैक्टेयर हो गई, लेकिन उत्पादन घटकर 37 लाख 48 हजार 713 टन यानी 901 किग्रा. प्रति हैक्टेयर ही रह गया। खरीफ में इस वर्ष चावल, ग्वार और मक्का की फसल के बुवाई रकबा का क्षेत्रफल भले ही कम हुआ हो, लेकिन उत्पादन में फिर भी वृद्धि हुई है। इसमें चावल में गत वर्ष के मुकाबले 7 हजार 113 हैक्टे. के कम रकबा में बुवाई हुई। लेकिन 1148 किग्रा.प्रति हैक्ट. की उपज अधिक है। इसी प्रकार ग्वार में 40 हजार 453 हैक्टे. की कम बुवाई हुई,लेकिन 275 किग्रा.प्रति हैक्टे. की अधिक पैदावार प्राप्त की गई है।