May 26, 2024

राजस्थानी चिराग रिपोर्टर

बीकानेर। बीछवाल खुली जेल से फरार हुए आजीवन कारावास के पांच सजाफ्ता कैदियों के खिलाफ कारागार प्रशासन की रिपोर्ट पर बीछवाल थाना पुलिस ने फरारी का केस दर्ज सरगर्मी से उनकी तलाश शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार हत्या और लूट के संगीन जुर्म में सजायफ्ता बंदी अल्लादीन पुत्र जमालदीन, रेणू उर्फ राजवीर पुत्र बाबूसिंह मीणा, सुनिल सिंह पुत्र ईश्वर सिंह, शंकर सिंह पुत्र भंवरलाल और तेजपाल सिंह पुत्र मिठू सिंह के बेहतर चाल चलन को देखते हुए कारागार प्रसासन ने उन्हे खुली जेल में भिजवा दिया। जहां पांचों कैदी एक-एक कर फरार हो गये। इनमें अल्लादीन शाह पुत्र जमालदीन करीब चार साल पहले 4 नवम्बर 2015 की रात फरार हो गया था, वहीं रेण्ूा उर्फ राजवीर भी गत 31 अक्टूबर 2016 की रात को भाग छूटा, इसके बाद बीते साल नवम्बर माह में सुनिल सिंह सिंह और उसके बाद 15 नवम्बर को शंकर सिंह पुत्र भंवरलाल फरार हो गये,अभी पिछले महिने 17 दिसम्बर की रात तेजपाल सिंह पुत्र मिठू सिंह भी खुली जेल के सुरक्षा बंदोबश्तों को धत्ता बताकर फरार हो गया। हालांकि कारागार प्रशासन ने फरारी के तुरंत बाद ही इनकी रिपोर्ट बीछवाल पुलिस को दे दी थी, लेकिन पुलिस ने इनकी फरारी का मुकदमा सोमवार की रात दर्ज किया है। यह भी खबर मिली है कि फरार हुए आजीवन कारावास कैदियों मेें शामिल कुख्यात अपराधी रेण्ूा उर्फ राजवीर पुत्र बाबूसिंह पिछले दिनों कोटा में हुई संगीन जुर्म की वारदात के पकड़ा जा चुका है,जो फिलहाल केन्द्रीय कारागार कोटा में कैद है, इसकी सूचना मिलने के बाद बीछवाल थाना पुलिस उसे कोटा जेल से गिरफ्तार कर बीकानेर लाने की तैयारी में जुट गई है।

पैराल पर फरार हो गये दो बंदी

वहीं केन्द्रीय कारागार में उम्रकेैद की सजायफ्ता दो अन्य कुख्यात बंदी भी पैरोल पर रिहा होकर फरार हो गये। सैंट्रल जेल से मिली जानकारी के अनुसार साजिशन हत्या के जुर्म में सजायफ्ता बंदी पिंटू सिंह पुत्र शेरसिंह मीणा निवासी सोठूका,सीकर तथा बुहाना, झूंझनू निवास लूट, अपहरण और हत्या के संगीन जुर्म में सजायफ्ता बंदी प्रदीप ङ्क्षसह राजपूत पुत्र बहादूर सिंह पिछले साल 9 अगस्त को पखवाड़े भर की पैरोल पर रिहा होकर गये थे जो वापस नहीं लौटे,बीछवाल थाना पुलिस ने कारागार प्रशासन की रिपोर्ट पर दोनों बंदियों के खिलाफ फरारी का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

कोई दो साल,तो कोई डेढ साल पहले फरार

मजे कि बात यह है कि संगीन जुर्म में सजायफ्ता इन बंदियों में से कोई दो साल पहले फरार हो गया तो कोई डेढ साल पहले और कारागार प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट पर बीछवाल थाना पुलिस का दे दी,लेकिन फरार कैदियों को गिरफ्तार कर उन्हे वापस सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिये जिम्मेदार पुलिस ने गिरफ्तारी के प्रयास तो दूर इनकी फरारी के मुकदमें भी डेढ-दो साल बाद दर्ज किये है। बताया जाता है कि आजीवन कारावास सजायफ्ता होने के कारण जेल की कैद से फरार यह कुख्यात बंदी अपराध जगत में नित नये जुर्म कर रहे है। बीछवाल पुलिस ने इनकी फरारी के मुकदमें दर्ज करने में देरी क्यों की, इस सवाल का जवाब पुलिस के पास नहीं है।