May 27, 2024

मौत हो जाने पर राजीनामें से दबा दिये जाते है मामले
बीकानेर। प्रसूताओं के लिये मरघट बने बीकानेर के नसिंग होम्स में डॉक्टरों की लापरवाही के कारण पीडि़ताओं की मौत के मामले लगातार सामने आने के बावजूद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अफसर इन नर्सिंग होम्स पर कार्यवाही का शिंकजा कसने में नाकाम बने हुए है। जानकारी के अनुसार यहां बीकानेर नर्सिंग होम,सुराणा नर्सिंग होम,रानी बाजार स्थित डॉ.इति माथुर होस्पीटल एंड रिर्सच सेंटर समेत बीकानेर में दर्जनों ऐसे नर्सिंग् होम्स है जहां सिजेरियर डिलवरी के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आते रहे है। इनमें से अधिकांश मामले पुलिस में दर्ज होने से पहले ही पीडि़त पक्ष पर दबाव बनाकर राजीनामे तब्दील हो जाते है। अभी हाल ही यहां पवनपुरी स्थित बीकानेर नर्सिग होम में साल पहले सिजेरियन डिलवरी के दौरान डॉ.दिप्ती वहल की लापरवाही से एक प्रसूता की मौत का मामला सुर्खियों में छाया हुआ है। अदालती इस्तगासे के तहत व्यास कॉलोनी थाने में दर्ज इस मामले में पुलिस जांच पड़ताल शुरू होने से पहले ही नर्सिग होम्स संचालकों और डॉ.दिप्ती वहल ने पीडि़त पक्ष से राजीनामे का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बीकानेर नर्सिग होम में सिजेरियन डिलेवरी के दौरान प्रसूता श्रीमति पूजा पेड़ीवाल पत्नि महेश पेड़ीवाल की डॉक्टर दिप्ती वहल की लापरवाही के कारण पिछले साल अप्रेल माह में हुई मौत के मामले को दर्ज इस हुई रिपोर्ट में मृतका के पति महेश पेड़ीवाल ने आरोप लगाया है कि मेरी पत्नि श्रीमति पूजा के प्रसव पीड़ा होने पर उसे गत २९ मार्च बीकानेर नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टर दिप्ती वहल ने उसका ऑपरेशन किया और ऑपरेशन के दौरान बिना जांच किये है खून चढा दिया, इससे संक्रमण के कारण मेरी पत्नि की मौत हो गई। पीडि़त पति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मेरी पत्नि की मौत के लिये डॉ.दिप्ती वहल सीधे तौर से जिम्मेदार है।
पहले भी दबाये जा चुके है मामले
जानकारी के अनुसार बीकानेर नर्सिंग होम में पिछले साल सिजेरियन डिलवरी के दौरान एक प्रसूता की संदिग्ध हालातों में हुई मौत के मामला सुर्खियों में आया था,लेकिन पुलिस केस दर्ज होने से पहले ही नर्सिग होम संचालकों ने पीडि़त पक्ष से राजीनामा कर यह मामला दबा दिया। जानकारों में की मानें तो बीकानेर नर्सिग होम समेत तमाम नर्सिग होम्स में पर्याप्त चिकित्सीय संसाधनों के अभाव और लापरवाह चिकित्सों एवं अप्रशिक्षु नर्सिग स्टाफ कर्मियों की वजह से सिजेरियन डिलवरी के दौरान प्रसूताओं की जान संकट में रहती है,कई बार प्रसूताओं की जान बच जाती है तो उसके नवजात की मौत हो जाती है। इन नर्सिंग होम्स को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को आये दिन शिकायते मिलने के बावजूद भी वह कार्यवाही के बजाय नर्सिग होम्स संचालकों के मददगार बने रहे है।