February 22, 2024

नई दिल्ली। माल एवं सेवाकर (जीएसटी) की वसूली अक्तूबर माह में करीब- करीब 10 प्रतिशत घटकर 83,346 करोड़ रुपए रह गई। कई वस्तुओं पर जीएसटी दर कम किये जाने और नई व्यवस्था को अपनाने में आ रही शुरआती दिक्कतों के चलते यह गिरावट आई है। इसके चलते कई अहम प्रावधानों का क्रियान्वयन आगे के लिये टाल दिया गया। 

वित्त मंत्रालय के बयान के मुताबिक अक्तूबर माह में 50.1 लाख व्यावसायियों ने जीएसटी रिटर्न भरा जिससे 83,346 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ।इससे पिछले महीने 92,000 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। 

राजस्व संग्रह में आई गिरावट के पीछे कई उत्पादों पर जीएसटी दर में की गई कमी को अहम् वजह बताया गया है। इसके अलावा कर प्रशासन इस समय कारोबारियों की स्वघोषणा के आधार पर ही कर प्राप्ति कर रहा है। रिटर्न का मिलान, इलेक्ट्रानिक ट्रांजिट परमिट प्रणाली यानी ई-वे बिल और प्रतिकूल शुल्क वसूली जैसे कई प्रावधानों को आगे के लिये टाल दिया गया है। 

इसके अलावा जीएसटी लागू होने के शुरआती तीन माह में एकीकृत जीएसटी यानी आईजीएसटी के रूप में अतिरिक्त कर वसूली हुई थी। आईजीएसटी के रूप में दिये गये कर को अब माल की अंतिम बिक्री होने पर उसका क्रेडिट लिया गया है। इससे भी कर वसूली में कम रही है। 

देश में जीएसटी प्रणाली की शुरआत एक जुलाई 2017 से हुई। इसमें केन्द्रीय उत्पाद शुल्क और राज्यों में लगने वाले वैट सहित एक दर्जन से अधिक करों को समायोजित किया गया है। इसमें जो भी जीएसटी प्राप्त होता है उसे केन्द्र और राज्यों के बीच बांटा जाता है। 

वित्त मंत्रालय के मुताबिक जुलाई-अगस्त के लिये राज्यों को उनकी राजस्व भरपाई के लिये 10,806 करोड़ रुपए जारी किये गये हैं। इसी प्रकार सितंबर-अक्तूबर के लिये 13,695 करोड़ रुपए की राशि जारी की जा रही है। यह राशि विलासिता और अहितकर सामानों पर वसूले गये उपकर से जारी की गई है। जीएसटी व्यवस्था में राज्यों के राजस्व को पूरी तरह से सुरक्षित रखने की व्यवस्था है। 

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जीएसटी लागू होने के पहले माह जुलाई में 95,000 करोड़ रुपए राजस्व प्राप्त किया गया। अगस्त में 91,000 करोड़ रुपए और सितंबर में 92,150 करोड़ रुपए राजस्व प्राप्त हुआ। 

जीएसटी लागू होने के बाद अब तक शुरआती जीएसटीआर-3बी जुलाई में 58.7 लाख, अगस्त में 58.9 लाख, सितंबर में 57.3 लाख और अक्तूबर में 50.1 लाख दर्ज किये गये हैं।