March 5, 2024

बीकानेर। डब्बल एप्पल… ओरेंज…कीवी…स्ट्रॉबेरी…। आप सोच रहे होंगे कि हम ज्यूस की बात कर रहे हैं लेकिन ये बीकानेर शहर में दिनोदिन खुलने वाले हुक्का बार में युवाओं को परोसे जाने वाले हुक्का फ्लेवर्स के नाम है। यहां बेफिक्री के साथ कॉलेजी छात्र-छात्राएं एवं युवा हुक्के के कस लेते दिख जाएंगे। शहर की पॉश कॉलोनियों में नए नए हुक्का बार खुल गए हैं। इनमें लड़के और लड़कियां दोनों एक साथ मिलकर धुएं के छल्ले बनाते हुए दिख जाएंगे,जो मदहोशी की लत के शिकार हो रहे है। जानकारी में रहे कि व्यास कॉलोनी पुलिस ने हाल ही दो जगह दबिश देकर अवैध रूप से चल रहे हुक्काबारों का पर्दाफाश किया था,इससे पहले पवनपुरी क्षेत्र में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम पर हुई हमलेबाजी की घटना में हुक्काबार का पर्दाफाश हुआ था। इनके अलावा शहर में ऐसे इलाके है जहां हुक्कबार चल रहे है। जानकारी में रहे बीकानेर जैसे पारंपरिक शहर में हालिया कुछ सालों में पनप रही महानगरी संस्कृति का आलम यह है कि रेस्टोरेंट के साथ हुक्का बार खोलने का एक अलग ही ट्रैंड चल पड़ा है। इससे सवाल खड़ा होता है कि आखिर पारंपरिक शहर का युवा किस दिशा में जा रहा है। क्योंकि जिस शहर में स्ट्रीट फूड का कल्चर बरसों से चल रहा है, वो अब धीरे धीरे कम होता जा रहा है। उसकी जगह चारदीवारी में बंद कमरे में कम रोशनी में हुक्के के कस आम बात हो गए हैं। शहर रथखाना,रानी बाजार पट्टी पेड़ा,सागर होटल के सामने,सिने मैजिक के सामने समेत आदि क्षेत्रों में अलग अलग जगह हुक्का बार खुल गए हैं। इन हुक्काबारों में नशे के कस खिंचने के लिये आने वाले युवाओं में अधिकतर कॉलेज में पढऩे वाले वे युवा हैं जो बाहर से आकर यहां हॉस्टल आदि में रहते हैं जिन पर उनके अभिभावकों की नजर न रहने से वे पढ़ाई से इतर इन गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। क्योंकि अक्सर देखा गया है कि हुक्का बार में धुएं के कस लेने के बाद ऐसे युवा अन्य कई नशे की चीजों का सेवन शुरू कर देते हैं। इन हुक्का बार को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन न होने से पुलिस यहां बहुत कम कार्रवाई करती है। हुक्का बार संचालक दबी जुबान से अपने हिसाब से नियम बताते हैं कि 18 साल की लड़की और 21 साल का लड़का इन हुक्का बार में जा सकता है। वे इस संबंध में कोर्ट के पुराने जजमेंट का हवाला देकर इसे गैर कानूनी नहीं बताते हैं।
नियमित नहीं होती चैकिंग
नशाखोरी का ठिकाना बन ये हुक्का बार ज्यादातर उन क्षेत्रों में होते हैं जहां कॉलेज के विद्यार्थी आसानी से पहुंच सकते हैं लेकिन पुलिस यहां कभी कभार ही आती है। सूत्रों की मानें तो इन हुक्का बार संचालकों की पुलिस के साथ मिलीभगत होती है। इसलिए इन पर उम्र सबंधी कानूनी पाबंदी को लेकर कोई कार्रवाई नहीं होती है। कई जानकारों से पूछने पर पता चला कि हुक्का बार में पिलाए जाने वाले फ्लेवर्स मादक पदार्थों की श्रेणी में नहीं आते हैं। सरकार की ओर से इन पर कोई खास गाइडलाइन नहीं है। वैसे शहर में जहां भी ये चल रहे हैं, वे अवैध ही कहे जा सकते हैं।
होने लगी है नाईट पार्टिया
शहर में पड़ताल करने पर पता चला कि युवाओं के लिये अय्याशी का ठिकाना बने हुक्काबारों में अब नाईट पार्टियां भी होने लगी है। ये सभी हुक्का बार अंडरग्राउंड हॉल या बहुमंजिला इमारत में किसी कोने में बने हॉल में होते हैं। जहां हर किसी को पता नहीं चलता है। नाइट क्वीन, कीवी, पान रसाना, मलाई पान, पान सालसा, रॉयल गोल्ड, सुपारी, रजनीगंधा, ग्रिप्स, मिंट, ओरेंज, वनीला, एक्स ऑन द बीच, कमिश्नर, वॉटरमैलन, डबल एप्पल, महफिल, कच्ची कैरी, स्प्रिंग वॉटर, रमाडा, स्ट्रॉबेरी, लेमन आदि फ्लेवर्स हुक्का बार में सर्व किए जाते हैं। इनके अलावा भी कई फ्लेवर्स हैं जिनकी डिमांड पर हुक्का बार संचालक उपलब्ध कराते हैं। शहर हुक्का बार में देर रात तक पार्टियां भी होने लगी हैं। जिन पर कोई रोक लगाने वाला नहीं है।