April 23, 2024

थोमसन राउतर्स फाउन्डेसन नामक किसी संस्था ने एक सर्वे करवाकर घोषित रपट में बताया की यौन हिंसा और गुलामो जैसी मजदूरी कराने के कारण भारत महिलाओं के लिए सारे विश्व में सब से ज्यादा असुरक्षित देश है। जहा लोकतंत्र नहीं वैसे देश सीरिया और अफ़घानिस्तान महिलाओं के लिए भारत से ज्यादा सुरक्षित माना गया।हालांकि इस सर्वे रपट के बारे में भारत सरकार की ओर से कोई तुरंत प्रतिक्रिया नहीं आई। क्या रपट में बताये गए आंकड़ो को सही माना जा शकता है क्या? सर्वे करानेवाली संस्थान कैसी है, उसकी विश्वनीयता का पता भी होना चाहिए। लोकतंत्र देश भारत सीरिया और अफगानिस्तान से भी पीछे रह गया। लगता है की इस रपट में कहीं न कही कुछ गरबड हो शक्ती है और यदि रपट सही है तो भारत के लिए इससे ज्यादा शर्मजनक बात ओर क्या हो शक्ती है।

भारत की कुल आबादी में करीब ५० प्रतिशत जन संख्या महिलाओ की है। ये बात सच है की महिलाओ में साक्षरता का प्रमाण कम है। ग्रामीण क्षेत्र में इसका अनुपात ज्यादा है। लेकिन जैसा की इस सर्वे रपट में कहा गया की गुलामो जैसी मजदूरी कराई जाती है इसका सच तराशना होंगा। आझादी के ७० साल के बाद भी आज के २१ सदी के दो दशक पुरे होने आये फिर भी भारत में महिलाओ से गुलामो जैसी मजदूरी कराई जा रही ये शर्म की बात है साथ में सरकार को इसकी जांच भी करवानी चाहिए। महिला सशक्तिकरण के भरपूर प्रयास किये जा रहे है। बेटी बचावो बेटी पढावो की मुहीम कई वर्षो से चल रही है। महिलाओ को रोजगार और स्वरोजगार के साधन मुहैया करवाये जा रहे है। कन्या शिक्षा मुफ्त की जा रही है। ढेर सारे प्रयास, सरकारी योजनाये फिर भी सर्वे रपट में बात कुछ ओर निकल कर आ रही है तो सरकार को इसकी संज्ञान लेनी होंगी। भारत में काम कर रही ताता कंसल्टंसी जैसी कोई संस्थान के जरिये इस विषय में अलग से सर्वे करवाना चाहिए ताकि जो संस्थान ने भारत को महिलाओ के लिए सबसे ज्यादा असुरक्षित बताया उस में कितनी सच्चाई है उसका भी पता चले।

सीरिया और अफगानिस्तान में कई बरसो से हालात युध्ध के सामान रहे है। आज भी वहा लोकतंत्र नहीं। सीरिया में तो बाकायदा आतंकियो का राज था। ऐसे में वहा की महिलाये लोकतंत्र वाले भारत की तुलना में कितनी सुरक्षित रही होंगी इसक की कोई कल्पना कर शक्ता है क्या? इतिहास गवाह है की युध्ध और युध्ध जैसे हालत में सब से ज्यादा महिला और बच्चो को निशाना बनाया जाता है। सब से ज्यादा यौन हिंसा महिलाओ पर होती है। सवाल यह है की क्या भारत में युध्ध या युध्ध जैसे हालत कभी रहे है? फिर भारत में यौनाचार और हिंसा के मामले में महिलाएं सब से ज्यादा असुरक्षित कैसे हो शकती है ? कुछ तो गरबड है। और यदि नहीं तो फिर भारत का सर शर्म से झुक जाना चाहिए।