February 25, 2024

मिनिमम बैलेंस से राहत की उम्‍मीद लगाए SBI के ग्राहकों के लिए बुरी खबर है। एसबीआई के ग्राहकों को तय मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं करने की सूरत में पैनल्‍टी देनी होगी। देश के सबसे बड़े बैंक के कस्‍टमर्स के लिए पहले की तरह मिनिमम बैलेंस के जरूरी नियम लागू रहेंगे, हालांकि, यह नियम अलग-अलग तरह की ब्रांचों में अलग-अलग होगा। मिनिमम बैलेंस के मामले में किसके खाते में कितनी पैनल्‍टी लगेगी, यह औसत मिनिमम बैलेंस पर भी निर्भर करेगी। मिनिमम बैलेंस की शर्तों के मामले में एस.बी.आई. ने अपनी ब्रांचों को चार तरह से बांटा है- मेट्रो, रूरल, अर्बन और सेमी-अर्बन। अर्बन या मेट्रो ब्रांचों के कस्‍टमर्स पर पहले की तरह 3000 रुपए मिनिमम औसत बैलेंस का नियम लागू रहेगा। SBI ने पिछले साल जून में मिनिमम बैलेंस को बढ़ाकर 5000 रुपए कर दिया था. हालांकि, बाद में इसे मेट्रो शहरों में घटाकर 3000, सेमी-अर्बन में 2000 और ग्रामीण क्षेत्रों में 1000 रुपए किया गया था। नाबालिग और पेंशनर्स के लिए भी इस सीमा को कम कर दिया गया था. पैनल्टी को 25-100 रुपए से घटाकर 20-50 रुपए के रेंज में लाया गया था। गौरतलब है कि एसबीआई में मिनिमम बैलेंस की सीमा दूसरे पब्लिक सेक्टर बैंकों से अधिक और बड़े प्राइवेट बैंकों से कम है। आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, कोटक और एक्सिस बैंक के मेट्रो अकाउंट्स में मिनिमम बैलेंस सीमा 10 हजार रुपए है। हालही में एसबीआई ने अप्रैल और नवंबर 2017 के बीच मिनिमम बैलेंस मेनटेन नहीं करने की वजह से ग्राहकों से 1,772 करोड़ रुपए जुर्मना वसूला। मेट्रो या अर्बन ब्रांचों में मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं करने पर 30 से 50 रुपए के बीच पैनल्‍टी के साथ ही उस पर जीएसटी भी देनी होगी। सेमी अर्बन और ग्रामीण शाखाओं के लिए पैनल्‍टी 20 रुपए से लेकर 40 रुपए और जीएसटी है, हालांकि यह पैनल्‍टी मिनिमम बैलेंस कितना है, इस पर भी निर्भर करती है। SBI ने एक बार फिर से अपने ग्राहकों को झटका दिया है। बता दें SBI ने मिनिमम बैलेंस की लिमिट को बरकरार रखा है। इस बात की पुष्टि करते हुए SBI ने कहा,”खाते में तय मिनिमम बैलेंस से कम राशि होने पर पेनल्टी देनी होगी। मिनिमम बैलेंस के मामले में किसके खाते में कितनी पैनल्‍टी लगेगी, ये औसत मिनिमम बैलेंस पर भी निर्भर करेगी।” हालांकि, ये नियम अलग-अलग तरह की ब्रांचों में अलग-अलग होगा।
SBI ने पिछले साल जून में मिनिमम बैलेंस को बढ़ाकर 5000 रुपए कर दिया था। हालांकि, बाद में इसे मेट्रो शहरों में घटाकर 3000, सेमी-अर्बन में 2000 और ग्रामीण क्षेत्रों में 1000 रुपए किया गया था। नाबालिग और पेंशनर्स के लिए भी इस सीमा को कम कर दिया गया था। पैनल्टी को 25-100 रुपए से घटाकर 20-50 रुपए के रेंज में लाया गया था। गौरतलब है कि एसबीआई में मिनिमम बैलेंस की सीमा दूसरे पब्लिक सेक्टर बैंकों से अधिक और बड़े प्राइवेट बैंकों से कम है। आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, कोटक और एक्सिस बैंक के मेट्रो अकाउंट्स में मिनिमम बैलेंस सीमा 10 हजार रुपए है। हालही में एसबीआई ने अप्रैल और नवंबर 2017 के बीच मिनिमम बैलेंस मेनटेन नहीं करने की वजह से ग्राहकों से 1,772 करोड़ रुपए जुर्मना वसूला। नई दिल्ली स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी और तीसरी तिमाही में ऐवरेज मिनिमम बैलेंस नहीं रखनेवाले खाताधारकों से जुर्माने के रूप में कितने रुपये की कमाई की है, यह बताने से इनकार कर दिया। मध्य प्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने जब सूचना के अधिकार के तहत पेनल्टी से प्राप्त रकम की जानकारी मांगी तो SBI ने यह कहते हुए बताने से इनकार कर दिया कि यह आरटीआई के दायरे में नहीं आता है। एसबीआई ने कहा, ‘मांगी गई सूचना वाणिज्यिक विश्वास प्रकृति की है और यह सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8(1)(d) के तहत प्रकटन से मुक्त है।’ हैरत की बात यह है कि एसबीआई ने ही इसी वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बिल्कुल एसी ही सूचना मांगे जाने पर न केवल जुर्माने से प्राप्त रकम बल्कि औसत न्यूनतम राशि नहीं रखनेवाले खातों की संख्या की जानकारी भी दी थी। SBI की ओर से 29 जनवरी 2018 को दी गई जानकारी की कॉपी। 5 अगस्त 2017 को दिए जवाब में देश के सबसे बड़े बैंकिंग प्रतिष्ठान ने बताया था, ’30 जून 2017 को समाप्त तिमाही के दौरान मासिक औसत शेष नहीं बनाए रखने के कारण वसूल की गई राशि 235.06 करोड़ रुपये और खातों की संख्या 388.74 लाख है।’तब एसबीआई ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(3) का हवाला दिया था। SBI की ओर से 5 अगस्त 2017 को दी गई जानकारी की कॉपी। बहरहाल, एसबीआई के इस दोहरे रवैये से क्षुब्ध आरटीआई कार्यकर्ता ने अब प्रथम अपीलीय प्राधिकार का दरवाजा खटखटाया है। अपने आवेदन में गौड़ ने कहा कि एक ही प्रकृति के सवाल पर दो अलग-अलग तरह के जवाब आश्चर्यजनक तो हैं ही, एसबीआई की मंशा पर भी सवाल खड़े करते हैं।