May 21, 2024

(जी.एन.एस)नई दिल्ली

भारत मोबाइल इंटरनेट स्पीड के मामले में श्रीलंका, नेपाल और पाकिस्तान से पीछे है. ओकला द्वारा जारी नवंबर स्पीडटेस्ट ग्लोबल इंडेक्स के मुताबिक भारत मोबाइल इंटरनेट स्पीड के मामले में भारत की रैंकिंग 109वें नंबर पर है, जबकि श्रीलंका(107), पाकिस्तान(89) और नेपाल(99) नंबर पर हैं. इस श्रेणी में टॉप पर नॉर्वे है. इसी क्षेत्र में ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में भारत की ग्लोबल रैंकिंग 76वीं है.

तो क्या धीमी इंटरनेट स्पीड चिंता का विषय नहीं होनी चाहिए? क्योंकि डिजिटल इंडिया के रथ पर सवार देश जब गांव-गांव तक नेट के आसरे तमाम सरकारी सुविधाओं की सफलता सुनिश्चित करना चाहता है तो फिर इंटरनेट की स्पीड ही पहला अहम मुद्दा है. यूं 2017 की शुरुआत में मोबाइल डाउनलोड स्पीड 7.65 एमबीपीएस थी, जो इस साल नंबबर में बढ़कर 8.80 एमबीपीएस हो गई यानी मोबाइल डाउनलोड स्पीड के मामले में बीते एक साल में 15 फीसदी का इजाफा हुआ लेकिन क्या यह काफी है?

दरअसल, इंटरनेट स्पीड के मामले में दुनिया जिस तेजी से कुलांचे भर रही है और जिस तत्परता से इंटरनेट की स्पीड को तेज करने और उसे सुगम बनाने के प्रयोग दुनियाभर में हो रहे हैं- उनके बीच भारत में इंटरनेट की स्पीड और इसकी उपलब्धता की धीमी गति चिंताजनक है.

उदाहरण के लिए तीन साल पहले डेनमार्क के वैज्ञानिकों ने डाटा ट्रांसफर की सबसे तेज गति हासिल करने का रिकॉर्ड बनाया. उन्होंने एक सेकेंड में 43 टेराबाइट यानी 44,032 जीबी डाटा ट्रांसफर किया. सरल शब्दों में समझने की कोशिश करें तो अब एक सेकेंड में 700 एमबी की 64,000 फिल्में एक डिस्क से दूसरे डिस्क में कॉपी हो सकती है. इसके पहले जर्मनी के एक इंस्टीट्यूट ने 32 टेराबाइट डाटा प्रति सेकेंड ट्रांसफर का रिकॉर्ड बनाया था. ये स्पीड शोधकर्ताओं को नए ऑप्टिकल फाइबर के इस्तेमाल से मिली है, जिसे जापान की टेलीकॉम कंपनी एनएनटी से लिया गया था.

लेकिन, सवाल डाटा ट्रांसफर की गति से पहले इंटरनेट की गति का है. 15 अगस्त को भारत में इंटरनेट आए 22 साल हो गए. इस दौरान भारत ने इंटरनेट की दुनिया को बदलते देखा है. डायलर से ब्राडबैंड की दुनिया में पदार्पण देखा है. बावजूद इसके अभी भी भारत में इंटरनेट की गति खासी कम है. जिस तरह भारत इंटरनेट के रथ पर सवार होकर तरक्की की नई दिशाएं खोज रहा है- उसमें यह गति परेशान करती है.

भारत में इंटरनेट के लिए जरुरी बुनियादी ढांचा इतना कमजोर है कि अच्छी स्पीड अभी भी दूर की कौड़ी है. फिर ग्रामीण क्षेत्रों में अभी इंटरनेट पहुंचा ही नहीं है. और जहां पहुंचा है, वहां उसकी स्पीड बेहद कम है.

आलम यह है कि जिस भारतनेट प्रोजेक्ट के तहत देश की हर पंचायत को इंटरनेट से जोड़ने का ख्वाब सरकारों ने देश को दिखाया-वो अपने लक्ष्य से कहीं पीछे चल रहा है. यूपीए सरकार हो या एडीए सरकार-दोनों भारतनेट प्रोजेक्ट को लेकर किए अपने वादे को निभा नहीं सकी. देश के ढाई लाख गांवों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने के लिए भारतनेट प्रोजेक्ट अक्टूबर 2011 में आरंभ किया गया था. उस वक्त इसे पूर्ण करने का लक्ष्य अक्टूबर 2013 रखा गया था. लेकिन मार्च 2013 तक सिर्फ पायलट प्रोजेक्ट शुरु हो पाया. दिसंबर 2013 तक केंद्र सरकार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से समझौता कर पाई. इनमें भी चंडीगढ़, हरियाणा, लक्ष्यद्वीप और तमिलनाडु से समझौता नहीं हो पाया. 2015 में देश का पहला जिला पूरी तरह इंटरनेट से जुड़ पाया.

मोदी सरकार आने के बाद 2015 में 2018 की नई टाइमलाइन तय की गई. प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दिया या कहें कि देने का दावा किया, उसमें लगा यही कि इस बार लक्ष्य वक्त से पूरा होगा. लेकिन-इसी महीने टाइमलाइन को और आगे बढ़ा दिया गया. अब भारतनेट प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य मार्च 2019 रखा गया है.

लेकिन सच यही है कि यह भी संभव नहीं है. दरअसल, नवंबर 2017 तक सिर्फ 30 फीसदी ग्राम पंचायतों में ही केबल पहुंचाकर इंटरनेट शुरु किया जा सका है यानी सरकार अगले 16 महीने में 70 फीसदी ग्राम पंचायतों में नेट पहुंचाने का दावा कर रही है,जो व्यवहारिक रुप में मुमकिन नहीं है. अगले साल नवंबर तक देश वैसे भी चुनाव के मोड में चला जाएगा, जिसमें जमीन पर काम कम होगा और दावे ज्यादा होंगे.

इंटरनेट का उपयोग अब सिर्फ साइट सर्फिंग, मेल भेजने अथवा चैटिंग करने तक सीमित नहीं रह गया है. इंटरनेट के जरिए आज ऑनलाइन पढ़ाई से सर्जरी तक हजारों काम हो रहे हैं. जिस तरह सरकारी सुविधाओं को आधारकार्ड और बायोमेट्रिक कार्ड से जोड़ा जा रहा है-उसमें इंटरनेट की अच्छी स्पीड एक अनिवार्यता है. इंटरनेट पर लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक को सुचारू रूप से चलाने के लिए पहले से कहीं तेज नेटवर्क की जरूरत महसूस की जा रही है. यह जरुरत दुनिया के सभी मुल्कों की है, लिहाजा इंटरनेट की स्पीड को बढ़ाने के लिए अपने अपने स्तर पर अनेक प्रयोग चल रहे हैं. लेकिन भारत की इंटरनेट स्पीड कहती है कि इस दिशा में भारत में कायदे से सोचा नहीं जा रहा.