February 26, 2024

‘जनता के काम नहीं करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को भेजा जाए जेल’, यह भी आए सुझाव

जयपुर। जनता के काम समय पर नहीं करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को जेल भेजने और पारदर्शिता के लिए सुनवाई प्रक्रिया सीसीटीवी के सामने करवाने का प्रावधान राज्य के प्रस्तावित जवाबदेही विधेयक में जोड़ने का सुझाव आया है। विधेयक के ड्राफ्ट पर अब तक करीब 35 सुझाव आए हैं। सुझाव देने की तारीख अब 30 नवम्बर तक बढ़ा दी गई है। सीआरपीसी, आइपीसी व सूचना का अधिकार से जुड़े मामलों को भी विधेयक के दायरे में लाने का सुझाव आया है।

सामने आया ड्राफ्ट
चार साल में मुख्यमंत्री दो बार बजट में यह कानून लाने की घोषणा कर चुके, लेकिन विधेयक विधानसभा नहीं पहुंचा। रामलुभाया की कमेटी दो साल पहले रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी, लेकिन ड्राफ्ट में कुछ सख्त प्रावधान देखकर नौकरशाही ने इसे अटका दिया। अब ड्राफ्ट जारी कर सरकार ने कानून लाने की मंशा जाहिर की है।

यह भी आए सुझाव
– समय पर काम नहीं होने को शिकायत की परिभाषा में लिया जाए।
– काश्तकारी अधिनियम के कार्यों को इसके दायरे में लिया जाए।
– उपखंड अधिकारी न्यायालय में पारिवारिक संपत्ति संबंधीविवादों के निस्तारण की समयसीमा तय हो।
– वन संबंधी योजनाओं को भी इस कानून के दायरे में लाया जाए।
– सभी कार्यों के लिए अधिकतम समयसीमा 15 दिन तय हो।

व्हिसल ब्लोअर्स को सुरक्षा प्रदान की जाए
निखिल डे ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण एवं परफोरमेंस अथॉरिटी जो कमियां निकालेगी, उनका समाधान कैसे होगा। समाधान एक माह में हो। जवाबदेही संबंधी इस कानून में काम नहीं करने वालों के खिलाफ एफआइआर दर्ज होनी चाहिए और व्हिसल ब्लोअर्स को सुरक्षा प्रदान की जाए। कानून की पालना नहीं करने को भी शिकायत की परिभाषा में शामिल किया जाए। इस कानून के तहत भ्रष्टाचार के जो भी मामले सामने आएं, उन्हें लोकायुक्त के पास भेज दिया जाए। इस कार्य के लिए लोकायुक्त स्वतंत्र जांच एजेंसी उपलब्ध कराई जाए और मुकदमा चलाने का अधिकार दिया जाए।

यहां भेजें सुझाव
सचिवालय स्थित पब्लिक सर्विसेज निदेशालय में सुझाव पेश किए जा सकते हैं, वहीं ई-मेल पर ard.dps@rajasthan.gov.in पर भेजी जा सकती है।

पुनरावलोकन किया जाना चाहिए
पॉलिटिकल एक्जीक्यूटिव्स की भी जवाबदेही तय हो और उसके लिए भी कानून लाया जाए। प्रस्तावित जवाबदेही कानून की रोशनी में समान प्रकृति के पुराने कानूनों का भी पुनरावलोकन कियाजाना चाहिए।
कविता श्रीवास्तव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, पीयूसीएल