February 25, 2024

जयपुर । संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। फिल्म को लेकर नित नए बवाल सामने आ रहे हैं। फिल्म के समर्थन और विरोध की राजनीति चरम पर है। फिल्म बड़े पर्दे पर कब रिलीज होगी और कैसी कमाई करेगी यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है। लेकिन इस बवाल का फायदा किसी और को जरूर मिल रहा है और कमाई भी जमकर हो रही है।

फिल्म पद्मावती पर मचे बवाल ने राजस्थान के मेवाड़ अंचल की अर्थव्यवस्था को ऊंचाई तक पहुंचा दिया है। वैसे तो फिल्म को लेकर पिछले तीन माह से विवाद चल रहा है, लेकिन एक माह में जिस तरह से राष्ट्रीय स्तर तक यह मामला चर्चा में आया है, उसके बाद मेवाड़ टूरिस्ट सर्किट में आने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। राज्य के पर्यटन विभाग के आंकड़ों, टूरिस्ट गाइड और स्थानीय व्यापारियों की मानें तो ‘पद्मावती’ विवाद के चलते मेवाड़ अचंल के पर्यटन व्यवसाय को संजीवनी मिली है।

मेवाड़ टूरिस्ट सर्किट में पिछले वर्ष तक उदयपुर देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था, लेकिन ‘पद्मावती’ विवाद के बाद सबसे अधिक भीड़ चित्तौड़ में रहने लगी है। पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले एक माह में चित्तौड़ में पर्यटकों की आवक में अचानक बढ़ोतरी हुई है और आगामी तीन माह तक की होटलों में एडवांस बुकिंग करवा दी गई है। राज्य की पर्यटन मंत्री कृष्णेन्द्र कौर दीपा का कहना है कि वैसे तो सर्दी में नवंबर से फरवरी तक पर्यटक सीजन माना जाता है, प्रति वर्ष काफी संख्या में पर्यटक मेवाड़ टूरिस्ट सर्किट का भ्रमण करने आते रहे हैं, लेकिन इस बार पिछले 15 से 20 दिन में अचानक पर्यटकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। 

पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पहले कभी पर्यटकों का इतना मेला चित्तौड़ दुर्ग में नहीं देखा। यहां पहुंचने वाला प्रत्येक पर्यटक पद्मनी महल, जौहर स्थल और पद्मनी मंदिर को देखने को लेकर उत्सुक नजर आ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह में तो पर्यटकों की इतनी भीड़ बढ़ी है कि सुबह 8 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक पैर रखने का स्थान नहीं मिल रहा।  राज्य पुरातत्व विभाग के निदेशक हृदेश शर्मा एवं पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस सीजन में पर्यटकों की संख्या में 10 से 17 फीसद तक पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

 
पर्यटकों में सबसे अधिक उत्सुकता तो चित्तौड़ दुर्ग को देखने को लेकर है। चित्तौड़ में तो पर्यटकों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। चित्तौड़ के होटल व्यवसायी शांतिलाल नागदा, टूरिस्ट गाइड राजेन्द्र बंजारा और दुर्ग के बाहर दुकानें लगाने वालों का कहना है कि पद्मावती को लेकर बढ़े विवाद के बाद पर्यटक काफी संख्या में आ रहे हैं। गुजरात के साथ ही दिल्ली, पंजाब और दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों से पर्यटक चित्तौड़ पहुंच रहे हैं, विदेशी पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी है। इनका कहना है कि पहले चित्तौड़ में होटल के कमरे का किराया 2000 से लेकर 2,500 रुपये तक होता था, लेकिन अब 4000 से 5000 रुपये तक किराए में कमरे खाली नहीं मिल रहे।

उधर उदयपुर में पांच सितारा होटलों में कमरों का किराया 20 से 25 हजार रुपये तक पहुंच गया है। स्थानीय रेस्टोरेंट्स एवं अन्य दुकानदारों के कामकाज में भी अच्छा प्रभाव पड़ा है। यहां आने वाले पर्यटकों का कहना है कि पद्मावती में विवाद देखने के बाद चित्तौड़ महल को देखने की इच्छा हुई। 

प्रदेश के संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड़ का कहना है कि वैसे तो राजस्थान में प्रतिवर्ष 2.5 करोड़ पर्यटक आते हैं, इनमें से करीब 50 से 60 लाख पर्यटक चित्तौड़, उदयपुर एवं नाथद्वारा पहुंचते हैं। वहीं पिछले वर्ष पर्यटकों की संख्या अनौपचारिक तौर पर एक साल में 3 करोड़ तक आंकी गई थी। इस वर्ष यह संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि चित्तौड़ और उदयपुर के साथ ही लोग जैसलमेर, बीकानेर, जयपुर आदि पर्यटन स्थलों की सैर भी करने आते हैं।

गुजरात, दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश के पर्यटक नाथद्वारा एवं चित्तौड़ के सांवलिया सेठ मंदिर में पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। अजमेर, पुष्कर, मेंहदीपुर बालाजी, खाटू श्याम मंदिर और सालासर हनुमान जी के मंदिर भी काफी तादाद में पर्यटक सालभर आते है