February 26, 2024

गुजरात विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण का आज मतदान हो रहा है। गुजरात चुनाव खत्म होने के साथ ही केंद्र सरकार ने तीन तलाक पर कानून बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को तीन तलाक में गैर जमानती अपराध बनाने वाले बिल को कैबिनेट में मंजूरी मिल सकती है। इसके बाद संसद के शीतकालीन सत्र में इसे पेश किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक सरकरा ने इस बिल को ‘द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ नाम दिया है। ये कानून तलाक-ए-बिद्दत पर लागू होगा। इस कानून के आने पर एक साथ में तीन तलाक पूरी तरह गैरकानूनी हो जाएगा। पीएम मोदी ने पहले ही इसके लिए एक मंत्रियों की एक समिति बनाई थी। जिसमें राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद, सुषमा स्वराज, पीपी चौधरी और जितेंद्र सिंह शामिल हैं।

संसद की शीतकालीन सत्र शुक्रवार से शुरू हो रहा है. इस सत्र में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है. विभिन्न मुद्दों को लेकर एनडीए सरकार को घेरने के लिए आज विपक्ष के नेताओं ने एक बैठक में विचार किया.

संसद के शुक्रवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में सरकार को प्रमुख मुद्दों पर घेरने के लिए आज कई विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई. कांग्रेस, राकांपा, तृणमूल कांग्रेस, सपा, राजद, नेशनल कांफ्रेंस और वाम दलों सहित विपक्षी दलों के नेताओं की आज राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के कक्ष में बैठक हुई. बैठक में संसद में उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया.

इस बैठक में भाग लेने वाले प्रमुख नेताओं में राकांपा के तारिक अनवर, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, सपा के नरेश अग्रवाल, राजद के जयप्रकाश नारायण यादव और भाकपा के डी राजा शामिल थे.

सूत्रों के मुताबिक अभी तक तीन तलाक की पीड़ित महिलाओं के पास न्याय का कोई रास्ता नहीं है। पीड़ित महिलाएं पुलिस के पास शिकायत लेकर जाती तो हैं लेकिन मामले में दंड का सही प्रवाधान नहीं होने के चलते पुलिस भी कोई ठोस कदम नहीं उठा पाती। इस वजह से केंद्र सरकार मुस्लिम महिलाओं को राहत देने के लिए जल्द से जल्द इस मसले पर नया कानून बनाना चाहती है।

आपको बता दें कि अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं को राहत देते हुए तीन तलाक पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट में 5 जजों की बेंच में 3 जजों ने इसको असंवैधानिक घोषित किया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस आरएफ नरिमन, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस यूयू ललित तीन तलाक के खिलाफ थे।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ये मामला धर्म से जुड़ा है, इस वजह से संसद को इस पर कानून बनाना चाहिए। इसके साथ ही तीन तलाक मूल अधिकारों पर चोट नहीं है। कोर्ट ने कहा तलाक ए बिद्दत अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अगर अब कोई शख्स अपने पत्नी को तीन तलाक देते है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।