April 20, 2024

– डॉ. वेदप्रताप वैदिक -कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी की ताजपोशी पर बयानबाजी जोरों पर है। इसे कोई मुगलिया ताजपोशी कह रहा है तो कोई वंशवाद की राजनीति ! अचरज़ की बात यही है कि राहुल गांधी निर्विरोध ही कांग्रेस के अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। एक भी कांग्रेसी ने राहुल के विरुद्ध उम्मीदवार बनने की हिम्मत नहीं की। उन्हें पार्टी-लोकतंत्र का कम से कम ढोंग तो कर देना था। मुझे अभी भी याद है कि जब सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ रही थीं, जितेंद्रप्रसाद ने उन्हें प्रतिद्वंदी उम्मीदवार के तौर पर चुनौती दी थी। उस दिन वे इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में मेरे साथ लंच कर रहे थे। पार्टी में लोकतंत्र है, यह तो सिद्ध हो रहा था लेकिन अब इसकी भी कोई जरुरत नहीं समझी जा रही है। हो सकता है कि डूबते हुए सूर्य को कोई नमस्कार करनेवाला भी नहीं मिल रहा है। लेकिन यह सच्चाई नहीं है। पिछले दो-तीन माह में यह सूर्य डूबता हुआ नहीं, उगता हुआ दिखाई पड़ने लगा है। राहुल ने अपनी अमेरिका-यात्रा के दौरान जो भाषण और बयान दिए तथा गुजरात में वे जैसा चुनाव-अभियान चला रहे हैं, उसने अधमरे कांग्रेसियों में जान फूंक दी है। इसमें शक नहीं है कि कांग्रेस-जैसी महान पार्टी यदि खत्म हो गई तो देश के लोकतंत्र के लिए यह अशुभ होगा। देश में कोई सशक्त विपक्ष नहीं रहेगा। जो भी सरकारें बनेंगी, वे निरंकुश होती चली जाएंगी। यह अच्छा है कि भाजपा अब कांग्रेस की तरह अखिल भारतीय पार्टी बनती जा रही है लेकिन वह बेलगाम न हो जाए, इसके लिए कांग्रेस का सबल होना जरुरी है। सच्चाई तो यह है कि देश के सभी दल कांग्रेस की प्रतिलिपि (कार्बन काॅपी) बनते जा रहे हैं। कांग्रेस मां-बेटा पार्टी बन गई है। एक प्रभाहीन कम्युनिस्ट पार्टी के अलावा देश में कौनसी ऐसी पार्टी है, जो दावा कर सके कि वह ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ नहीं है ? सारी प्रांतीय पार्टियां परिवारवाद के आंगन में झूला झूल रही हैं। कोई बाप-बेटा पार्टी है, कोई चाचा-भतीजा पार्टी है, कोई भाई-बहन पार्टी है और भाजपा भी भाई-भाई पार्टी बनती जा रही है। उसके अध्यक्ष के चुनाव में किसी ने चुनौती दी थी क्या ? सारी पार्टियां एक या दो नेताओं की कठपुतली बनजी जा रही हैं। यदि हमारी पार्टियों में से आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो गया तो वह भारतीय राजनीति का स्थायी आपात्काल बन सकता है।