February 26, 2024

राजस्थान हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में आदेश दिया कि प्रदेश में किसी भी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने से पूर्व जिला कलेक्टर को सूचित करना अनिवार्य होगा। जिला कलेक्टर धर्म परिवर्तन करने वाले की सूचना सात दिन तक अपने नोटिस बोर्ड पर लगाएंगे। धर्म परिवर्तन के सात दिन पश्चात ही कोई शादी कर पाएगा। इस प्रक्रिया को अपनाए बगैर धर्म परिवर्तन कर शादी करने वालो की शादी को अमान्य करार दिया जा सकेगा। धर्म परिवर्तन को लेकर प्रदेश में प्रस्तावित नए कानून के लागू होने तक यह आदेश प्रभावी रहेगा।

जोधपुर की एक युवती के धर्म परिवर्तन कर निकाह कर लेने के मामले में उसके परिजनों की ओर से दायर याचिका का निस्तारण करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोपाल कृष्ण व्यास और न्यायाधीश वीरेंद्र माथुर की खंडपीठ ने धर्म परिवर्तन के संदर्भ में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया।

खंडपीठ ने आदेश दिया कि प्रदेश में धर्म परिवर्तन करने के इच्छुक लोगों को इस बारे में जिला कलेक्टर या उपखंड अधिकारी के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत करना होगा। जिला कलेक्टर को धर्म परिवर्तन करने वाले के मय नाम पूरी सूचना अपने कार्यालय के नोटिस – – बोर्ड पर चस्पा करनी होगी। साथ ही धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति की भी जिम्मेदारी तय की गई है। आदेश के अनुसार उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि नया धर्म ग्रहण करने वाला किसी दबाव में तो ऐसा नहीं कर रहा है। साथ ही उसके नए धर्म के प्रति पूरी आस्था है या नहीं।

धर्म परिवर्तन के सात दिन पश्चात ही कोई महिला या पुरुष शादी या निकाह कर सकेंगे। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि इस प्रक्रिया की पालना नहीं करने वालों का विवाह शिकायत किए जाने की स्थिति में अमान्य माना जाएगा। खंडपीठ ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बारे में प्रदेश में नया कानून विचाराधीन है। ऐसे में इस कानून के लागू होने तक यह आदेश प्रभावी रहेगा। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि धर्म परिवर्तन कर फैयाज के साथ निकाह करने वाली युवती पर यह आदेश लागू नहीं होगा।