May 28, 2024

बीकानेर। राजस्थान की अजमेर और अलवर लोकसभा सीटों के साथ मांडलगढ विधानसभा सीट के लिये उपचुनावों को लेकर सट्टा बाजार की रिपोर्ट से जहां कांग्रेस उत्साहित नजर आ रही है,वहीं भाजपा को झटका लगने की उम्मीद है। बीकानेर के सट्टा जगत से जुड़े सूत्रों की मानें तो दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट के उपचुनावों पर डेढ सौ करोड़ से ज्यादा का दाव लगे हुए है। सट्टा जगत की रिपोर्ट के अजमेर लोकसभा सीट पर भाजपा का पलड़ा थोड़ा भारी लग रहा है,इसके अलावा अलवर संसदीय सीट और मांडलगढ विधानसभा सीट कांग्रेस के खाते में दर्ज होती नजर आ रही है। सट्टा बाजार में अजमेर संसदीय सीट पर कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी की जीत पर ५५-६० के भाव चल रहे है। वहीं अलवर लोकसभा सीट तथा मांडलगढ विधानसभा सीट पर कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी की जीत पर ४५-५५ भाव चल रहे है। सट्टा जगत का अनुमान है कि अलवर और मांडलगढ सीटों पर कांग्रेस की अच्छी जीत दर्ज होगी जबकि अजमेर संसदीय सीट पर जीत दर्ज करने के लिये कांग्रेस को पसीने छूटते दिख रहे है। अजमेर में मतदान से ठीक पहले आम बातचीत, मीडिया और सोशल मीडिया में बढ़-चढकऱ दावे करने वाले भाजपाइयों के सुरताल मतदान के बाद थोड़े कमजोर पड़ते नजर आये। अजमेर में 65.41 प्रतिशत मतदान कर दोनों पार्टियों की उलझनें बढ़ा दी है। चुनाव लडऩे वाले नेता हों या कार्यकर्ता कोई भी स्पष्ट रूप से अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं हैं। लेकिन सट्टा जगत का अनुमान है कि इस सीट पर कांग्रेस का पलड़ा भाजपा पर भारी रहेगा। सट्टा जगत की रिपोर्ट के मुताबिक शासन-प्रशासन के खिलाफ उपजी लहर के कारण अलवर संसदीय सीट के उपचुनावों में मतदान का कम प्रतिशत सत्तारूढ़ दल के लिए चिंता के संकेत है, माना जा रहा है कि उपचुनाव अभियान के दौरान वोटरों की सरकार से जो नाराजगी सामने आई थी कम वोटिंग प्रतिशत उसका नतीजा है। आंकड़े नीरस तो लग सकते हैं लेकिन यह कांग्रेसी खेमें में उत्साह के संकेत है।
मांडलगढ में भाजपा का पलड़ा कमजोर
मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव के लिये हुए करीब 79 फीसदी मतदान के बाद जीत को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता आश्वस्त है लेकिन सट्टा जगत की रिपोर्ट के मुताबिक यहां शासन-प्रशासन के खिलाफ कायम रहे माहौल के कारण वोटरों का रूझान कांग्रेस की तरफ रहा, इसके अलावा दमदार निर्दलीय प्रत्याशी के कारण बिगड़े समीकरणों का फायदा भी कांग्रेस को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यूं तो प्रत्याशियों के भाग्य का पिटारा एक फरवरी को खुलेगा, लेकिन मतदान की समाप्ति के बाद से ही नुक्कड़ और चौराहों पर उम्मीदवारों की हार जीत के कयास शुरू हो गए। त्रिकोणीय संघर्ष में फंसी इस सीट पर आम मतदाता दोनों प्रमुख दलों के बीच कड़ी टक्कर मान रहे है। अलग अलग इलाकों मतदान केन्द्रों पर मतदाताओं के रुझान, वोटिंग और चुनावी मैनेजमेंट के हिसाब से दोनों दलों का पलड़ा बराबर माना जा रहा है। जानकारी में रहे कि चुनावी सट्टे का केन्द्र बने बीकानेर के सट्टा बाजार में गुजरात विधानसभा चुनाव के समय भी सौदेबाजी हुई थी लेकिन उस वक्त सटोरियों का पूरा गणित फेल हो गया था। सटोरियों ने गुजरात चुनाव में बीजेपी को 115 से सीटें मिलने का अनुमान लगाया था लेकिन गुजरात में भाजपा १०० सीटों के अंदर ही सिमट गई, इससे राजस्थान के उप चुनावों में बीकानेर के सट्टा मार्केट में एक चौथाई की गिरावट दर्ज की गई थी।