February 22, 2024

मकर संक्रान्ति पर्व पर कस्बे में फिर दड़ा महोत्सव की धूम मचने वाली है। ऊंच-नीच, धनवान व निर्धन की दीवार गिराने वाले इस खेल में सामाजिक समरसता, साम्प्रदायिक सौहार्द व भाईचारे की महक उड़ती है। आवां सहित बारहपुरों के सात हजार खिलाड़ी अस्सी किलो वजनी इस फुटबॉल रूपी दड़े पर इस कदर पर पिल पड़ते हैं, कि उनके कपड़े भी तार-तार हो जाते हैं। दर्शक दीर्घा से ग्रामीण युवतियों उनका हौसला बढ़ाती है। सर्दी के बावजूद जवानों का शरीर पसीने से लथपथ हो जाता है। आने वाले मेहमान भी माहौल देख अपना दम-खम दिखाने के लिए दड़े के खेल में उतरने से स्वयं को रोक नहीं पाते है। राजस्थानी कला व संस्कृति की महक उड़ाते ग्रामीण अंचल के इस खेल को छत्तीस कौम की ओर से खेले जाने से सामाजिक एकता-समरसता का सन्देश भी मिलता है। रियासतकालीन समय में सेना में भर्ती का माध्यम बने इस खेल को दन्त कथाओं में आधुनिक फुटबॉल का जनक भी माना गया है। दड़ा महोत्सव की खास विशेषताओं के कारण यहां के लोग इसेे पर्यटन विभाग में शामिल कराने की मांग करते आये हैं। कस्बे की प्राकृतिक बनावट और बसावट दड़े के खेल के अनुकूल है। अखनियां दरवाजे व दूनी दरवाजे की ओर 6-6 गांव बसे हैं। जहां के ग्रामीण दड़े को सामने वाले दरवाजे में धकलने को जोर-आजमाइश करते हंै। आवां सहित बारहपुरों के लोग दो खेमों में बंटकर आमने-सामने हो जाते हैं। दोपहर से पहले ही दर्शक दीर्घा बने गोपाल मंदिर , विद्यालय भवन व आसपास के मकानों की छतें ठसाठस हो जाती है। खेल मैदान बने गोपाल चौक की रोनक दोपहर तक परवान छूने लगती हैं। दड़े के परिणाम से अकाल-सुकाल का संकेत देता है। ऐसी मान्यता रही है कि दड़ा दूनी दरवाजे को पार कर जाए तो आने वाला वर्ष खुशहाली और समृद्धि लाने वाला होगा। वहीं अगर यह अखनियां दरवाजा भेद जाए तो अकाल पडऩे के कयास लगाए जाते हैं। मकर संक्रांति के दिन दोपहर बारह बजे से तीन बजे तक खेले जाने वाले इस खेल में कोई रैफरी या निर्णायक नहीं होता है। राजपरिवार, मंत्री से लेकर आमजन के बड़े चाव से खेले जाने वाले इस खेल के नियम-कायदे भी अजीब हैं। गोपाल चौक बन जाता है खेल मैदान तो दूनी और आवां दरवाजा इसके गोल पोस्ट बन जाते हैं। मकानों की छतें व मंदिर की गुम्बद दर्शक दीर्घा बन जाती है। तीन घण्टे तक चलने वाले राग-द्वेष मिटाने वाले इस खेल में किसी खिलाड़ी के नीचे गिरने पर खेल रोक कर उसे उठाने की परम्परा से किसी के खरोंच तक नहीं आती है न ही कभी विवाद व झगड़े का माहौल बना है।