February 29, 2024

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने डीजी जेल को गुरुवार को तलब किया है। कोर्ट ने डीजी जेल से पूछा है कि सजा समाप्त होने के बावजूद भी कैदी को जेल से रिहा क्यों नहीं किया गया। जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस गोरधन बाढ़दार की खंडपीठ ने यह आदेश सुशीलसिंह पंवार की ओर से दायर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिए हैं। याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता के पिता चेक अनादरण के छह मामलों में जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट ने गत 8 मार्च को आदेश जारी कर पांच मामलों की सजा एक साथ भुगतने के निर्देश दिए थे। जबकि एक मामले की सजा पूरी हो चुकी है। सभी मामलों की सजा साथ-साथ चलने के कारण याचिकाकर्ता के पिता को मार्च 2017 में जेल से रिहा हो जाना चाहिए था। इसके बावजूद भी उन्हें अब तक रिहा नहीं किया गया है। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि निचली अदालत ने सजा के साथ अभियुक्त पर जुर्माना भी लगाया था। जिसे जमा नहीं कराने पर अभियुक्त को अलग से सजा भुगतनी होती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार जुर्माने के बदले भुगती जा रही सजा अलग-अलग ही चलती हैं। ऐसे में याचिकाकर्ता के पिता की सजा 18 नवंबर तक चलेगी। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि इसके बावजूद भी यदि गणना में कोई भूल हुई होगी तो उस पर भी विचार कर लिया जाएगा। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने डीजी जेल को पेश होकर तथ्यात्मक स्थिति की जानकारी देने आदेश दिए।