May 28, 2024

राजस्थानी चिराग रिपोर्टर

बीकानेर। पीबीएम होस्पीटल के वार्डो में बेडशीट(चादरों) की धूलाई में भी बेईमानी का खेल चल रहा है। इन चादरों की धूलाई पर हर माह सवा लाख रूपये खर्च किये जाने के बावजूद Óयादात्तर वार्डो की चादरें मैली रहती है। पु ता जानकारी है कि होस्पीटल के कई वार्डो में बेड पर चादरें नहीं होने के कारण रोगियों को अपने घर से चादरें लेकर आनी पड़ रही है,इसके अलावा जनाना होस्पीटल समेत अनेक वार्डो में नियमित रूप से चादरें नहीं बदली जाती,इससे रोगियों को मैली और संक्रमित चादरों पर लेटना पड़ता है। जबकि नियमानुसार हर दिन मरीज की चादर बदलना अनिवार्य है। अगर मरीज गंभीर है और बार-बार किसी कारण चादर खराब हो रही है तो भी उसे बदलना चाहिए। सामान्य मरीजों में चादर गंदी हो या न हो, अगले दिन जरूर बदली जानी चाहिए। गंदी चादर के कारण संक्रमण का खतरा रहता है। मजे कि बात यह है कि पीबीएम प्रशासन चादर धुलाई पर सालाना 1३ लाख रुपए से अधिक राशि खर्च कर रहा है। इसके बावजूद वार्डो के बेडों पर मैली और धब्बेदार चादरें पीबीएम अस्पताल चादरों की धूलवाई में बेईमानी के खेल की पोल खोल रही है। में 2100 बेड हैं। इसके अलावा ऑपरेशन थियेटर, लेबररूम व ट्रोमा सेंटर में प्रतिदिन 900 से 1000 चादर काम में ली जाती हैं। इन चादरों पर हर माह करीब सवा लाख रूपये धुलाई का खर्चा होता है। धुलाई पर हर साल करीब 1३ लाख 71 हजार 600 रुपए का खर्चा पीबीएम प्रशासन वहन कर रहा है। इसके बावजूद वार्डो बेडों पर मैली कुचेली चादरें बदबू मारती है,रोगियों की शिकायत करने पर उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। इतना ही नहीं, इनके दाग-धब्बे भी साफ नहीं होते हैं। अस्पताल प्रशासन को इस बारे में अवगत कराये जाने के बावजूद अनदेखी की जा रही है।