February 25, 2024

राज्य सरकार ने 31 दिसंबर को प्रदेश के 40 आईएएस अफसरों को पदोन्नति का तोहफा तो दे दिया, लेकिन पदोन्नति पाने वाले आधा दर्जन से अधिक आईएएस अधिकारियों में मायूसी है। उनको मौजूदा विभागों में ही पदोन्नति के बाद तैनात कर रखा है। जबकि वे उम्मीद लगाए बैठे थे कि पदोन्नति के बाद उनका तबादला दूसरे विभाग में होगा। वहीं इस सरकार के बीते चार सालों में लगातार विवादों में रहे सुबोध अग्रवाल का चौथी बार तबादला किया गया है, वहीं आधा दर्जन से अधिक अधिकारी चार सालों से एक ही विभाग में तैनात हैं। राज्य सरकार ने बीती रात आदेश जारी कर गृह विभाग के प्रमुख सचिव दीपक उप्रेती, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव वीनू गुप्ता, कृषि विभाग की प्रमुख सचिव नीलकमल दरबारी, परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव शैलेन्द्र अग्रवाल को अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर पदोन्नति तो दे दी है, लेकिन उनका तबादला नहीं किया गया, जबकि कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार पदोन्नति देने के साथ ही जंबो तबादला सूची भी जारी करेगी। अमूमन पदोन्नति के बाद अब तक आईएएस अफसरों के तबादले किए जाते रहे हैं।
सूक्ष्म व लघु उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव सुबोध अग्रवाल बीते चार सालों से लगातार विवादों में रहे हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग, खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभाग और सूक्ष्म व लघु उद्योग विभाग के मंत्रियों और अफसरों से लगातार उनका विवाद रहा और उनको हटा कर दूसरे विवागों में भेजा गया। एक महिला अधिकारी से विवाद होने के बाद सुबोध अग्रवाल को वन व पर्यावरण विभाग में भेजा गया है। वहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव वीनू गुप्ता का विभाग के मंत्री ?कालीचरण सराफ से लगातार विवाद चल रहा है। हालात ऐसे हैं कि दोनों ही एक दूसरे की जरूरी फाइलों तक को क्लीयरेंस नहीं दे रहे हैं। वहीं सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल से सरकार की किरकिरी के बाद माना जा रहा था कि वीनू गुप्ता को इस विभाग से हटाया जाएगा। 31 दिसंबर की रात यह भी कयास लगास जा रहे थे कि अगर आईएएस अफसरों की जंबो तबादला सूची जारी नहीं भी करे तो तीन साल से ज्यादा समय से एक ही विभाग में तैनात आधा दर्जन से अधिक आईएएस अफसरों को दूसरे विभागों में भेजा जाएगा। लेकिन लंबे समय से एक ही विभाग में तैनात अफसरों को भी मायूसी हाथ लगी। आईटी विभाग के प्रमुख सचिव अखिल अरोड़ा, नेशनल हेल्थ मिशन के एमडी नवीन जैन, शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव नरेशपाल गंगवार समेत आधा दर्जन से अधिक अधिकारी तीन साल से ज्यादा समय से एक ही विभाग में हैं।