April 23, 2024

बीकानेर। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में ‘शुष्क एवं अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में उद्यानिकी फसलों के उत्पादन व मूल्य संवर्धन की उच्च तकनीकÓ विषयक इक्कीस दिवसीय शीतकालीन प्रशिक्षण गुरुवार को प्रारम्भ हुआ। प्रशिक्षण में नौ राज्यों 25 उद्यानिकी वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने की। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए वैज्ञानिक शुष्क एवं अर्द्धशुष्क क्षेत्रों की उद्यानिकी फसलों एवं इनके मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर मंथन करें। यहां प्राप्त ज्ञान कृषकों तक पहुंचाएं, जिससे उनकी आय में इजाफा हो। उन्होंने कहा कि मरूस्थलीय क्षेत्रों में जलवायु की विषम परिस्थितियों के बावजूद किसानों का उद्यानिकी फसलों की ओर रुझान बढ़ा है। नई तकनीकों के प्रयोग से उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। अब हमें इनके मूल्य संवर्धन की ओर देखना होगा। उन्होंने शुष्क एवं अर्द्धशुष्क क्षेत्रों की प्रमुख उद्यानिकी फसलों के बारे में बताया। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान के निदेशक प्रो. पी. एल. सरोज ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद कृषि उत्पादन के क्षेत्र में हम आत्मनिर्भर बने हैं। आज हमारे गोदाम अनाजों से भरे हैं। उन्होंने कृषि और पशुपालन को एक-दूसरे का पूरक बताया तथा बागवानी फसलों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के कृषि वैज्ञानिक वैचारिक आदान-प्रदान करें। कृषि विश्वविद्यालय, कोटा के पूर्व कुलपति प्रो. जेड. एस. सोलंकी ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या, बदलती जलवायु और घटती कृषि योग्य भूमि के बीच उत्पादन की स्थिरता एक चुनौती है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
इन विषयों पर किया जायेगा मंथन
अनुसंधान निदेशक प्रो. एस एल गोदारा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उद्यानिकी फसलों की टिकाऊ एवं संरक्षित खेती, नर्सरी उत्पादन, हाइड्रोपॉनिक सिस्टम, कीट नियंत्रण, जैव उर्वरक उत्पादन आदि विषयों पर मंथन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश का बड़ा भू-भाग शुष्क एवं अर्द्धशुष्क क्षेत्र है। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि आइसीएआर द्वारा प्रायोजित विंटर स्कूल में कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, पंजाब और राजस्थान के वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण 27 नवंबर तक चलेगा। उन्होंने प्रशिक्षण की विभिन्न गतिविधियों के बारे में बताया। कृषि अनुसंधान केन्द्र के क्षेत्रीय निदेशक प्रो. पी. एस. शेखावत ने आभार जताया। संचालन विवेक व्यास ने किया। इससे पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण की शुरूआत की। इस दौरान कुलसचिव कपूर शंकर मान, प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. एस के शर्मा, प्रो. सुभाष चंद्र, प्रो. मीनाक्षी चौधरी, प्रो. आर. एस. यादव, अधिष्ठाता प्रो. आई. पी. सिंह, प्रो. वीर सिंह, प्रो. विमला डुकवाल, डॉ. आर. के. नारोलिया, डॉ. ममता सिंह आदि मौजूद रहे।