May 28, 2024

बीकानेर। जब हम तमाम सुविधाओं के साथ घरों में रजाई के साथ दुबके होते है। ‘एक दुनियाÓ ऐसी भी होती है, जो फुटपाथ पर सारी रात सर्दी में जिंदगी के लिए संघर्ष करती रहती है। कोई एक शॉल में तो कोई एक फटे हुए कंबल में सर्दी से दो-दो हाथ करता दिखता है। सर्दी के कोप में कई जगह इंसान और जानवर का फर्क तक खत्म हो जाता है। दोनो साथ साथ बस किसी तरह सुबह होने का इंतजार करते दिखते है। शहर में छोटी-मोटी मजदूरी कर गुजारा करने वाले खानाबदोश लोगों के लिये सर्द रातें किसी चुनौती से कम नहीं है। पिछले चार-पांच दिनों से हांड कपाने वाली सर्दी इन खानाबदोश और बेघर लोगों के लिये बड़ी आफत बन कर आई है। हमारे न्यूज रिपोर्टर ने बीताी जब शहर की सड़कों का जायजा लिया तो ये लोग खुले आसमान तले रात गुजारते दिखाई पड़े। मजदूरी कर अपना जीवन यापन करने वाले लोग, बुजुर्ग जहां ठोर मिल रही वहीं इस ठिठुराने वाली सर्दी में खुले आसमान नीचे सोते दिखे। रात दस बजे बाद जहां बाजारों में सन्नाटा नजर आया वहीं यह फुटपाथ पर दुबके हुए थे। जबकि शहर बंद कमरों में रजाइयों के बीच दुबका हुआ था।सड़कों पर आलम यह रहा कि कोई दुकानों के आगे तो पट्टियों पर सोता हुआ नजर आया। स्टेशन रोड़ पर विशाल मेघामार्ट के सामने तो फुटपाथ पर एक बुजुर्ग सर्दी में कांपता मिला। वहीं मालगोदाम रोड़ पर बेघर परिवारों के गरीब लोग रात अलाव तापकर सर्दी से संघर्ष करते नजर आये,इनके मासूम बच्चे-बच्चियां भी शामिल थे। पूछने पर अपनी पीड़ा जाहिर करते इन लोगों ने बताया कि गर्मी में कोई परेशानी नहीं आती। सर्दी में रात काटनी मुश्किल हो जाती है। राजीव गांधी मार्ग पर तीन अधेड़ एक रजाई में लिपटे मिले। हालांकि नगर निगम प्रशासन ने इन बेघरों और खानाबदोश परिवारों के लिये मटका गली में रैन बसेरा खोल रखा है,जहां खाने-पीने और सोने के लिये व्यवस्था है लेकिन इस रैन बसेरे में दंबगो का दबदबा होने के कारण असहाय लोगों को जगह नहीं मिलती है। इस रैन बसेरे को कई पियक्कड़ बाबाओं ने अपना स्थायी ठिकाना बना रखा है। जगह को लेकर रैन बसेरे में अमूमन झगड़ेबाजी होती रहती है,इस लिये खानाबदोश और बेघर परिवारों के लोग इसके आस पास फटकने से भी घबराते है।