March 5, 2024

बीकानेर। शहर में पिछले पन्द्रह साल के अंतराल में सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां डवलप हुई। अधिकारियों की चुप्पी से इस दौरान 90 फीसदी कॉलोनियां बिना अनुमति डवलप हो गई। जिला प्रशासन द्वारा अवैध घोषित की जा चुकी इन कॉलोनियों के भूखण्डधारियों को हर वक्त कॉलोनी से बेदखली का डर सता रहा है और इस डर से ज्यादात्तर भूखण्डधारी औने-पौने दामों में भूखण्ड बेच रहे है। इन 15 सालों में सिर्फ एक तत्कालीन कलेक्टर आरती डोगरा ने सख्ती दिखाई तो कॉलोनाइजर भूमिगत हो गए थे, लेकिन इनके तबादले के बाद मॉनिटरिंग नहीं होने से सिलसिला वापस शुरू हो गया है। हालात यह हैं कि कॉलोनी कटने का सिलसिला अब भी जारी है। बीकानेर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ गरज की ओर से लगातार चलाई जा रही मुहिम के तहत अवैध कॉलोनियों बसाने वाले कॉलोनाईजरों के साथ बीकानेर के नामी नेताओं और प्रशासनिक अफसरों की मिलीभगत को लगातार उजागर किया जा रहा है। अवैध बसी कॉलोनियों के खिलाफ चलाई गई गरज की इस मुहिम से लोगों में जागरूकता आई,इसी का परिणाम है लोग इन कॉलोनियों में भूखण्ड खरीदने से परहेज करने लगे है। लेकिन विडम्बना है कि शासन-प्रशासन की कमजोरी के कारण अवैध कॉलोनियों बसाने का सिलसिल अभी भी जारी है। कॉलोनियों बसाने के लिये हाईकोर्ट द्वारा बनाई गई गाईड लाईन के तमाम नियम कायदों को बीकानेर के कॉलोनाइजर इन्हें हल्के में ले रहे हैं। उन्हें कोई भय नहीं है कि इससे प्लॉट खरीदार या उन पर कोई कार्रवाई हो सकती है। हालात यह हैं कि रोक के बावजूद कॉलोनी काटने वाले यहां तक कह रहे हैं कि जो पहले होता आया है वह आगे भी जारी रहेगा। समय के साथ पट्टे भी मिल जाएंगे। मजे कि बात यह है कि इस मामले में जिला प्रशासन द्वारा हाईकोर्ट के आदेशों की पालना में सिर्फ नोटिस जारी कर खानापूर्ति की जा रही है। जबकि अब सख्ती के साथ इन्हें रोका जाना चाहिए। लेकिन इन कॉलोनाईजरों के साथ राजनेताओं की पार्टनरशिप है। ऐसे में जयपुर मुख्यालय स्तर से उच्चाधिकारियों के दबाव के बाद निचले स्तर पर कड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती। जब कभी कार्रवाई होती है तो राजनेताओं का दबाव शुरू हो जाता है।
पांच साल रहा जबरदस्त बूम
जिले में साल 2008 से 2012 तक बिना अनुमति की कॉलोनी डवलप होने का बूम रहा। इस दौरान जमीन के भावों आसमान छू रहे थे। इस दौर में कॉलोनाईजरों के साथ-साथ बीकानेर के प्रशासनिक अफसरों और स्थानीय नेताओं ने जमकर मोटी कमाई की। समय के साथ अफसर बदलते गए, इसके बाद भी कार्रवाई की जिम्मेदारी किसी भी अफसर ने पूरी नहीं की। नियमानुसार अवैध कॉलोनियां कटने की प्रक्रिया को शुरुआत में ही रोका जाना चाहिए।
खूब कमाया फिर भूल गये
कॉलोनाईजनों ने लोगों को तमाम सुविधाएं देने का वादा कर प्लॉट बेचे,खूब रूपया कमाया और प्लॉट बेचने के बाद कॉलोनियों को भूल गए। नेताओं की पार्टनरशिप होने के कारण बीकानेर के जनप्रतिनिधयों ने कभी किसी मीटिंग में अवैध कॉलोनियां का मुद्दा नहीं उठाया। जबकि शहर की व्यवस्थित बसावट के लिए जनप्रतिनिधियों की बड़ी जिम्मेदारी होती है, क्योंकि वे सरकार से जुड़े होते हैं।