April 20, 2024

अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को करीब 1.78 अरब डॉलर का कर्ज देने वाले चाइना डेवलपमेंट बैंक ने कंपनी द्वाप कर्ज भुगतान में चूक करने के बाद आरकॉम के खिलाफ नैशनल कॉरपोरेट लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के मुंबई पीठ में मामला दर्ज कराया है। बैंकिंग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि भारतीय कर्जदाता चाइना डेवलपमेंट बैंक की याचिका पर आपत्ति जता सकते हैं क्योंकि वे पहले से ही आरकॉम के साथ कर्ज निपटान योजना पर काम कर रहे हैं।

चीन के बैंक ने यह कदम भारतीय कर्जदाताओं द्वारा आरकॉम के 45,700 करोड़ रुपये के कर्ज को इक्विटी में बदलने के निर्णय लेने से महज कुछ हफ्तों पहले उठाया है। इससे मामले में कानूनी पेच फंस सकता है। ऋणशोधन एवं दिवालिया संहिता के मुताबिक जब किसी कंपनी को एनसीएलटी में ले जाया जाता है और अदालत को याचिका में दम नजर आता है तो वह निपटान पेशेवरों की नियुक्ति करती और कंपनी के निदेशक मंडल को निलंबित कर दिया जाता है। इसके बाद निपटान पेशेवर कंपनी की परिसंपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया का निर्णय करते हैं।

हालांकि कंपनी के अंदरूनी लोगों ने कहा कि उन्हें चाइना डेवलपमेंट बैंक या एनसीएलटी से अभी कोई निर्देश नहीं मिला है। चाइना डेवलपमेंट बैंक ने इससे पहले मई में आरकॉम-एयरसेल के विलय के खिलाफ याचिका दायर कर उसका खाका मांगा था कि कंपनी अपना कर्ज का भुगतान कैसे करेगी। हालांकि आरकॉम-एयरसेल विलय का सौदा नहीं हो पाया, जिसके बाद आरकॉम ने एनसीएलटी से विलय याचिका वापस ले ली।

इस साल 13 जून को भारतीय रिजर्व बैंक ने 12 बड़े कर्जदारों को आईबीसी के तहत निपटान के लिए एनसीएलटी में जाने के लिए चिह्नित किया। लेकिन आरबीआई के निर्णय के कुछ दिनों पहले 2 जून को आरकॉम को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अगुआई में कर्जदाताओं से रणनीतिक कर्ज पुनर्गठन योजना के तहत थोड़ी राहत मिली। इसके तहत कंपनी को दिसंबर 2018 तक मूलधन और ब्याज देने से छूट दी गई। कर्ज पुनर्गठन योजना आर-कॉम-एयरसेल विलय और ब्रुकफील्ड के हाथों दूरसंचार टावरों की 11,000 करोड़ रुपये में बिक्री पर आधारित थी। लेकिन दोनों ही सौदे परवान नहीं चढ़ सके।

भारतीय कर्जदाता आरकॉम के कर्ज को इक्विटी में बदलने की दर पर अभी बातचीत कर रहे हैं। कर्जदाताओं का कहना है कि वे कर्ज को इक्विटी में बदलने के लिए कंपनी के मौजूदा बाजार भाव को ध्यान में रखेंगे, वहीं आरकॉम कर्ज पुनर्गठन योजना के समय के शेयर भाव 24.71 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से कर्ज को इक्विटी में बदलने पर जोर दे रही है। सोमवार को आरकॉम का शेयर 13.35 रुपये पर बंद हुआ और 1 जनवरी से इसके भाव में करीब 61.6 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 5,326 करोड़ रुपये रह गया है।

सभी दूरसंचार कंपनियों की तरह ही आरकॉम की कमाई पर भी मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो की मुफ्त वॉयस सेवाओं का असर पड़ा है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण घरेलू दूरसंचार बाजार में वॉयस कॉल की दरों में भारी गिरावट आई है जिसकी वजह से टाटा टेलीसर्विसेज और आरकॉम जैसी कंपनियों को बाजार से बाहर होने को मजबूर होना पड़ रहा है।आरकॉम ने अपनी 2जी/3जी सेवाओं को बंद कर दिया है, वहीं डायरेक्ट टु होम टीवी कारोबार को बेचना पड़ा है। कंपनी बैंकों के लिए एक नई योजना दी है, जिसमें कर्ज की रकम बट्टे खाते नहीं डालनी होगी और बैंक उसके दूरसंचार टावरों और रियल एस्टेट की बिक्री से मिलने वाली रकम को कर्ज के बदले ले लेंगे।